इंटरनेट काॅल का किया था इस्तेमाल
इस मामले में साइबर अपराधियों ने आईपी(वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) काॅल का इस्तेमाल किया था। पुलिस उस आईपी एड्रेस को ट्रेस करने में भी जुटी है, जिसके जरिये यह कॉल की गई। इस तरह की कॉल इंटरनेट के जरिये की जा सकती है और इसके लिए कॉल करने वाले के पास फोन का होना जरूरी नहीं है। फिलहाल, पुलिस वह आईपी एड्रेस ट्रेस करने में जुटी है, जिस पर चल रहे इंटरनेट कनेक्शन से यह कॉल की गई। महिला के खाते से उड़ाई गई रकम दो बैंक खाताें में ट्रांसफर की गई। इनमें से एक खाता एसबीआई व दूसरा खाता यस बैंक का है। इन्हीं में से एक खाते में भेजी गई 40 लाख की रकम को तत्परता दिखाते हुए होल्ड करा दिया गया।
यह है पूरा मामला
यह प्रयागराज का पहला केस है जिसमें महिला को डिजिटल अरेस्ट कर उससे साइबर ठगी की गई। वादिनी का आरोप है कि उनके नाम पर ड्रग्स, लैपटॉप व क्रेडिट कार्ड वाला पार्सल ताइवान भेजने की बात कहकर पहले इंटरनेशनल कूरियर कंपनी का कर्मचारी बनकर एक व्यक्ति ने संपर्क किया। पार्सल के बारे में जानकारी न होने की बात कहने पर शिकायत दर्ज कराने को कहा। फिर पुलिस अफसर बनकर एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल पर बात की और डरा-धमकाकर रकम खातों में जमा करवा लिए।
क्या है डिजिटल अरेस्ट
यह साइबर अपराध का नया तरीका है। इसमें साइबर ठग लोगों को झूठे इल्जाम लगाकर ब्लैकमेल करते हैं। जब आप उनकी बातों में फंस जाते हैं तो वह पुलिस के बड़े अधिकारी से बात कराने का झांसा देकर अपने ही गिरोह के किसी अफसर से वीडियो कॉल पर बात कराते हैं। इसके बाद शिकार बनाए गए व्यक्ति को इतना डरा धमका दिया जाता है कि वह घबरा जाए। साथ ही फंसने का डर दिखाकर किसी से संपर्क करने, कॉल करने या घर से बाहर निकलने से भी मना कर दिया जाता है। वह बताता है कि आपका आधार, सिम कार्ड, बैंक अकाउंट किसी गैरकानूनी काम के लिए इस्तेमाल हुआ है। साथ ही अगर उसकी बात नहीं मानी तो आप कानूनी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। इसके बाद वह रुपयों की मांग करता है।