तीसरी श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थी सिर्फ पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अर्ह होंगे। इस प्रकार यदि कोई अभ्यर्थी नेट की परीक्षा में तीनों श्रेणियों में से किसी में भी उत्तीर्ण होता है तो वह पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अर्ह होगा। कुलपति ने बताया कि पीएचडी पाठ्यक्रम की प्रवेश प्रक्रिया में नेट परीक्षा के स्कोर का भारांक 70 प्रतिशत होगा और इंटरव्यू का 30 का प्रतिशत का होगा। दोनों भारांकों को जोड़कर मेरिट तैयार होगी।
वहीं, जेआरएफ उत्तीर्ण विद्यार्थियों का सीधे साक्षात्कार होगा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट तैयार की जाएगी। पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी के प्राप्त नेट स्कोर केवल एक वर्ष तक वैध होंगे। राज्य विवि के पीआरओ डॉ.अविनाश श्रीवास्तव ने बताया कि 27 मार्च को जारी यूजीसी की अधिसूचना को विश्वविद्यालय के शोध अध्यादेश में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। विश्वविद्यालय जल्द ही पीएचडी में प्रवेश की अधिसूचना जारी करेगा।
ऑफलाइन मोड में होगी परीक्षा
इस बार यूजीसी नेट ऑनलाइन की जगह पुनः ऑफलाइन ओएमआर पर होगी। ऑनलाइन परीक्षा में केंद्र पर सर्वर डाउन की समस्या के साथ ही परीक्षा के बीच में छात्रों के कंप्यूटर बंद होने, कॉम्प्रीहेंशन पढ़ने में समस्या समेत अनेक दिक्कतें आती थीं, जिससे छात्रों को राहत मिलेगी।
18 जून को होगी परीक्षा
यूजीसी/सीएसआईआर नेट की परीक्षा 18 जून को आयोजित की जाएगी। पहले यह परीक्षा 16 जून को प्रस्तावित थी,लेकिन उसी दिन संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा भी प्रस्तावित है। दोनों परीक्षा तिथि टकराने के कारण अभ्यर्थियों को किसी एक परीक्षा से वंचित होना पड़ता। अभ्यर्थियों की मांग पर यूजीसी ने परीक्षा तिथि में संशोधन करते हुए इसे 18 जून के लिए प्रस्तावित किया है।
पटरी पर आ सकेगा सत्र
यूजीसी नेट के माध्यम से पीएचडी में प्रवेश के कई फायदे होंगे। जहां अच्छे शोधार्थियों की संख्या बढ़ेगी, वहीं छात्र-छात्राओं का समय और धन दोनों बचेगा। अनके विश्वविधालयों का शोध सत्र बहुत पीछे चल रहा है और अभी तक सभी विश्वविद्यालयों द्वारा शोध प्रवेश परीक्षा अलग-अलग आयोजित की जाती थी। अब विश्वविद्यालयों पर शोध प्रवेश परीक्षा के आयोजन का बोझ भी कम होगा और सत्र पटरी पर आ सकेगा।