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High Court : खेती के ऑफ सीजन में छोटे-मोटे काम करने वालों को किसान योजना से वंचित नहीं किया जा सकता

Sat, 18 Oct 2025 02:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि खेती के ऑफ सीजन में गुजर-बसर के लिए छोटे-मोटे काम करने वाले किसानों को किसान कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि खेती के ऑफ सीजन में गुजर-बसर के लिए छोटे-मोटे काम करने वाले किसानों को किसान कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने ट्रक पर खलासी का काम करने वाले मृतक की पत्नी को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत मुआवजा देने से इन्कार करने वाले डीएम के आदेश को रद्द कर दिया।

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यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी.सर्राफ और न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की खंडपीठ ने आजमगढ़ निवासी सविता यादव की याचिका पर दिया। सविता के पति संजय ट्रक पर गेहूं की बोरी लाद रहे थे। उसी दौरान लोहे की छड़ बिजली के तार के संपर्क में आने से उनकी मौत हो गई थी। सविता ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना कि तहत मुआवजे का दावा करते हुए डीएम के समक्ष आवेदन किया। डीएम ने 29 मार्च 2023 को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया था कि मृतक ट्रक का खलासी था और उसकी आय का मुख्य स्रोत कृषि कार्य नहीं था।

याची ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कहा था कि कृषि भूमि उनके ससुर के नाम पर थी पर संजय परिवार के कमाऊ सदस्य थे और उनकी आय का मुख्य स्रोत कृषि ही था।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खेती की मंदी के दौरान लोगों का छोटा-मोटा काम करना बहुत आम है। केवल इस आधार पर कि दुर्घटना के समय मृतक खलासी का काम कर रहा था, उसे किसान योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने डीएम के आदेश को रद्द कर उन्हें नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा है कि मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के खंड 2 के उप-खंड (2) (जिसमें खातेदार/सहखातेदार के परिवार के कमाऊ सदस्य को शामिल किया गया है) के अनुसार यह सुनिश्चित करें कि क्या मृतक खातेदार के परिवार का कमाऊ सदस्य था या नहीं। कोर्ट ने डीएम को यह भी निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करें और आठ सप्ताह में कारण सहित और स्पष्ट आदेश पारित करें।

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