दूसरी ओर प्रयागराज-बमरौली के बीच चौथी लाइन के कार्य के लिए 350 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस रेलमार्ग पर एक रेल फ्लाईओवर का भी निर्माण चल रहा है। ओवरऑल इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 494.11 करोड़ रुपये है। फिलहाल एनसीआर की पिंक बुक में करोड़ों की लागत से किए जाने वाले 25 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल है। इ
समें मथुरा से झांसी के बीच तीसरी लाइन, अलीगढ़ से हरदुआगंज तक फ्लाई ओवर समेत दूसरी लाइन, आगरा फोर्ट से यमुना ब्रिज के बीच एक नया पुल और दूसरी लाइन का निर्माण इसमें मुख्य रूप से शामिल है। एनसीआर के सीपीआरओ हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि अंतरिम बजट में एनसीआर को आधारभूत संरचना के लिए करोड़ों का बजट मिला है। प्रयागराज से डीडीयू के बीच तीसरी लाइन का कार्य अब और रफ्तार पकड़ेगा।
प्रोजेक्ट के नाम - अंतरिम बजट में स्वीकृत धनराशि
प्रयागराज-पंडित दीन दयाल उपाध्याय तीसरी लाइन (150 किमी) - 800 करोड़
प्रयागराज जंक्शन-बमरौली चौथी लाइन (10 किमी, फ्लाई ओवर सहित) - 350 करोड़
झांसी-बीना तीसरी लाइन (152.57 किमी) - 102 करोड़
मथुरा से झांसी तीसरी लाइन (273.80 किमी) - 365.58 करोड़
झांसी-खैरार-मानिकपुर और खैरार-भीमसेन तक दूसरी लाइन (411 किमी) - 950 करोड़
यमुना ब्रिज-आगरा फोर्ट दूसरी लाइन (2.11 किमी) - 11 करोड़
आगरा फोर्ट-बांदीकुई दूसरी लाइन (150 किमी) - 150 करोड़
अलीगढ़-हरदुआगंज फ्लाईओवर (22 किमी) - 100 करोड़
अलीगढ़-दाउदखान तीसरी लाइन (6.9 किमी, फ्लाईओवर सहित) - 100 करोड़
उपलब्धि : 686 में से 584 ट्रेनें हो गई अब एलएचबी रेक से लैस
उत्तर मध्य रेलवे ( एनसीआर) जोन में चल रही 85 फीसदी ट्रेनें जर्मन तकनीक वाले एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) से लैस हो गई हैं। 31 जनवरी 24 तक यहां चल रहीं 686 में से 584 ट्रेनों के रेक एलएचबी में तब्दील कर दिए गए हैं। शेष 102 ट्रेनों को भी इस वर्ष के अंत तक एलएचबी रेक में बदलने की तैयारी है। माह भर के भीतर प्रयागराज से चलने वाली कालिंदी एक्सप्रेस को भी एलएचबी रेक मिल जाएगा।
एनसीआर वर्तमान में देश का एकमात्र ऐसा जोन है जहां चलने वाली 85 फीसदी से ज्यादा ट्रेनें एलएचबी रेक में तब्दील हो चुकी हैं। ट्रेनों में इसे लगाने के बाद प्रयागराज मंडल में एक भी जनहानि का हादसा अब तक नहीं हुआ है। रेलवे प्रशासन की तैयारी है कि अगले एक वर्ष के भीतर जोन से चलने वाली सभी एक्सप्रेस ट्रेनों में एलएचबी रेक लगा दिए जाएं।
एलएचबी कोच में होती हैं ज्यादा सीटें
बीते कुछ वर्ष से रेलवे का एलएचबी रेक वाली ट्रेन चलाने पर ही जोर है। क्योंकि इससे यात्रा तो आरामदायक होती है साथ ही ट्रेन के पटरी से उतरने और एक कोच के दूसरे पर चढ़ने की आशंका न के बराबर होती है। ये बोगियां काफी सुरक्षित होती हैं। इन बोगियों में सामान्य की तुलना में सीटें भी ज्यादा होती हैं।
एनसीआर की बात करें तो यहां से गुजरने वाली 81 फीसदी एक्सप्रेस ट्रेनें एलएचबी रैक से लैस हो गई हैं, जबकि एक वर्ष पूर्व यहां 70 फीसदी ट्रेनें ही एलएचबी रेक से लैस थी। इसका बड़ा फायदा यह रहा कि दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई रूट पर इन ट्रेनों को अधिकतम 130 की स्पीड से दौड़ाया भी जा रहा है। साल भर में अगर सभी ट्रेनों के रेक अगर एलएचबी में तब्दील हो जाते हैं तो यहां ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 160 किमी प्रतिघंटे हो जाएगी।
एनसीआर जोन की 81 फीसदी ट्रेनों में एलएचबी रेक लग गए हैं। आने वाले समय में सभी ट्रेनें एलएचबी रेक से लैस हो जाएंगी। -हिमांशु शेखर उपाध्याय, सीपीआरओ, एनसीआर।