इसके बाद श्रीमती मायादेवी स्मारक शिक्षा समिति के प्रबंधक और विधि विश्वविद्यालय के दो छात्रों की ओर से याचिका दाखिल की गई। याचिका में रजिस्ट्रार के 14 अक्तूबर 2022 के आदेश को चुनौती दी गई थी और संस्थान में लगाए गए ताले को खुलवाकर पढ़ाई शुरू कराने की मांग की गई थी। याचियों के अधिवक्ता आरके ओझा ने तर्क दिया कि समिति के किसी एक सदस्य पर गैंगस्टर का आरोप लगने से किसी शैक्षिक संस्थान में ताला नहीं लगाया जा सकता है।
सरकारी अधिवक्ता ने दलील दी कि मामले में जिला मजिस्ट्रेट के दिनांक 11 अगस्त 22 के आदेश के तहत आदेश पारित किया गया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कुलपति के 13 अक्तूबर 2022 के आदेश को चुनौती नहीं दी गई है। रजिस्ट्रार के जिस आदेश को चुनौती दी गई, वह कुलपति के द्वारा दिए गए आदेश के क्रम में पारित आदेश है। जब तक कुलपति के आदेश को चुनौती नहीं दी जाएगी, तब तक रजिस्ट्रार के आदेश को रद्द नहीं किया सकता है।