Prayagraj News : हिंदुस्तानी एकेडेमी में किताबों पर लगाया गया बार कोड।
- फोटो : प्रयागराज
फिलहाल नौ हजार किताबों और 10.16 लाख पृष्ठों को डिजिटल किया जा चुका है। जिन किताबों को अब तक डिजिटल कराया जा चुका है, उनमें कबीर का साखी संग्रह, बीजक, अखरावती, अनुराग सागर, भजनमाला, चार खंडों में शब्दावली शामिल हैं। इनके अलावा पद्माकर रचित जगद्विनोद, जगत विनोद, पद्मभरण अलंकार, प्रबोध पचासा, राम रसायन अयोध्याकांड, राम रसायन बालकांड और हिम्मत बहादुर बिरदावल को भी डिजिटल किया जा चुका है।
Prayagraj News : हिंदुस्तानी एकेडेमी में किताबों पर लगाया गया बार कोड।
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हिंदी खड़ी बोली के प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र के सुंदरी तिलक, कार्तिस्नान, देवी छद्मलीला, भारतेंदु नाटकावली,दुर्लभ बंधु के अलावा मैथिलीशरण गुप्त, रामधारी सिंह दिनकर, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद और सुमित्रानंदन पंत की कृतियां भी डिजिटल करा ली गई हैं। इनके अलावा सरस्वती, चांद, हिंदुस्तानी पत्रिकाओं के दुर्लभ अंक भी इसमें शामिल किए गए हैं। लाइब्रेरियन रतन कुमार पांडेय बताते हैं कि अब पुस्तकालय में किताबें पढ़ने के लिए कैटलॉग से ढूंढकर नहीं निकाली जाएंगी। अलबत्ता डिजिटल लाइब्रेरी में कंप्यूटर लगाए जाएंगे। बार कोड के जरिए एक क्लिक के साथ ही कंप्यूटर स्क्रीन पर मनचाही किताबें खुल जाएंगी। इसके अलावा पेन ड्राइव में भी इसे शोधार्थी डाउनलोड कर ले जा सकेंगे। व्हाट्सएप पर भी किताबों की पीडीएफ फाइल उपलब्ध हो सकेगी।