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Prayagraj News: तकनीकी का विवेकपूर्ण उपयोग की जरूरत

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डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में शुक्रवार को शुरू अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कानून- प्रौद्योगिकी और सतत विकास विषय पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग कैसे किया जाए।
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उन्होंने सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, सतत विकास एक वैश्विक घटना है और जब तक देश इसमें भाग नहीं लेंगे, तब तक जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करना मुश्किल होगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने अपने अध्यक्षीय भाषण में इस बात पर जोर दिया कि सभी प्रगति का मूल कानून की भूमिका में निहित है और सतत विकास की सफलता में कानून न केवल आकांक्षात्मक है, बल्कि सहायक भी है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने सतत विकास को बनाए रखने में कानूनी दृष्टिकोण पर जोर दिया।
इससे पहले कुलपति प्रोफेसर ऊषा टंडन ने सम्मेलन के विषय पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सम्मेलन स्मारिका का विमोचन भी किया गया। इसके अतिरिक्त, हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार राशि प्रदान की गई। उद्घाटन सत्र का समापन विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री सत्य प्रकाश द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। सम्मेलन में श्रीलंका न्यायमूर्ति एस. थुराईराजा, नेपाल के न्यायमूर्ति कुमार रेगमी, भूटान के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रिनजिन पेनजोरसमेत अनेक प्रमुख लोग मौजूद रहे।
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