रबर फैक्टरी में एक बार फिर दिखी बाघिन।
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लगातार सटीक लोकेशन मिलने के बाद पकड़ने की तैयारी शुरू
फतेहगंज पश्चिमी। रबर फैक्टरी के जंगल में चहलकदमी कर रही बाघिन की शुक्रवार को कोयला प्लांट से डिस्टलरी प्लांट को जाने वाले रास्ते पर लगे कैमरों में मिली है। कई दिन से लगातार सटीक लोकेशन मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने अब फिर बाघिन को पकड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।
पिछले कई महीने से रबर फैक्टरी में मौजूद बाघिन की लगातार सटीक लोकेशन मिलने के बाद वन विभाग के अफसरों ने राहत की सांस ली है। अब वन विभाग ने फिर से बाघिन को पकड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। बता दें कि बीच में यह बाघिन लगातार 16 दिन तक कैमरों से ओझल रही थी। अब यह पिछले दस दिन से लगातार कोयला, डिस्टलरी और रबर प्लांट में लगे कैमरों में देखी जा रही है। वन विभाग की टीम का कहना है कि उच्च अधिकारियों से संपर्क किया जा चुका है। अगर ऐसे ही बाघिन की लगातार सटीक लोकेशन मिलती रही तो अक्तूबर के अंतिम सप्ताह से पहले ही एक्सपर्ट की टीम आ सकती है। वन कर्मियों का कहना है कि बाघिन अब पहले के मुकाबले तंदरुस्त भी नजर आ रही है।
बंजरिया चौराहे पर गांव वालों ने देखा तेंदुआ
बहेड़ी। शीशगढ क्षेत्र में तेंदुआ की चहलकदमी लगातार जारी है। शुक्रवार रात करीब साढ़े दस बजे लोगों ने बंजरिया चौराहे पर तेंदुआ बैठा देखा तो वन विभाग की टीम को सूचना दी गई। मगर टीम के पहुंचने तक तेंदुआ वहां से जा चुका था।
बंजरिया गांव के प्रधान घनश्याम उपाध्याय ने पुलिस और वन विभाग को सूचना दी कि शुक्रवार रात करीब साढ़े दस बजे लोगों ने चौराहे पर तेंदुआ को बैठे देखा। छतों पर मौजूद लोगों ने शोर मचाया तो तेंदुआ जंगल की ओर चला गया। प्रधान ने बताया कि यह तेंदुआ भी पहले पकड़े जा चुके तेंदुआ के ही बराबर है। वहीं, बहेड़ी रेंजर रवींद्र कुमार सक्सेना ने कहा कि गांव वालों की सूचना पर एक टीम मौके पर भेजी गई थी। टीम ने वहां से जो फोटो भेजे हैं, उनमें पगचिह्न स्पष्ट नहीं हो रहे हैं।
ग्रामीण को सौंपी बकरे को पिंजड़े में बांधने की जिम्मेदारी
मीरगंज। शीशगढ़ इलाके के गांव बुझिया से उपासना नाम की बच्ची को तेंदुआ ने शिकार बनाया था। इसके बाद वहां से एक तेंदुआ पकड़ा गया लेकिन गांव वाले अभी एक और तेंदुआ होने का दावा कर रहे हैं। इस पर वन विभाग ने वहां दो पिंजड़े और लगाए हैं। इनमें से बुझिया गांव के जंगल में लगे पिंजड़े में बंधा बकरा बीमार हो गया है। गांव वालों ने इस बदलने की मांग की तो वन विभाग ने उस बकरे को एक गांव वाले के सुपुर्द कर दिया और उसे दिन में पिंजड़े से खोलने और रात में बांधने की जिम्मेदारी सौंप दी। इससे गांव वालों में गुस्सा है। वहीं, शीशगढ़ इंस्पेक्टर राजकुमार तिवारी का कहना है कि इलाके के तमाम गांवों के लोग तेंदुआ को लेकर दहशत में हैं। इसके चलते उन्होंने वन विभाग के बहेड़ी रेंजर और एसडीओ को पत्र लिखकर तेंदुआ पकड़वाने को कहा है ताकि दूसरी घटना न हो सके।