इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) छात्रसंघ के महामंत्री शिवम सिंह के खिलाफ हुई निलंबन की कार्रवाई का मुद्दा गरमाता जा रहा है। इविवि प्रशासन ने शिवम के परिसर में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया है। इसके विरोध में छात्रसंघ के सभी पदाधिकारी खड़े हो गए हैं और उन्होंने इविवि प्रशासन को शिवम पर हुई कार्रवाई एक सप्ताह में वापस लेने का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि इविवि प्रशासन मनमानी पर उतारू रहा तो छात्र व्यापक पैमाने पर आंदोलन शुरू कर देंगे और परीक्षाओं के दौरान आंदोलन के लिए इविवि प्रशासन जिम्मेदार होगा।
एनएसयूआई से छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव, एबीवीपी से महामंत्री शिवम सिंह एवं पूर्व अध्यक्ष रोहित मिश्र ने शुक्रवार को छात्रसंघ भवन में संवाददाताओं से कहा है कि इविवि प्रशासन जिस 100 रुपये के अर्थदंड की आड़ में महामंत्री शिवम सिंह को घेरने की कोशिश कर रहा है, वह केवल साजिश है। अगर महामंत्री ने किसी अनुशासनहीनता के लिए अर्थदंड जमा कर दिया है तो दो साल बाद मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है। तीनों छात्र नेताओं ने चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे पर भी कई आरोप लगाए।
उन्होंने प्रो. दुबे की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट पर हुई। छात्र नेताओं ने आठ मार्च 2017 को तत्कालीन सांसद द्वारा उस वक्त एमएचआरडी मंत्री रहे अर्जुन सिंह को भेजा गया वह पत्र दिखाया, जिसके नियुक्ति पर सवाल उठे हुए इसे रद्द करने की सिफारिश की गई थी। छात्र नेताओं ने 11 साल पहले प्रो. दुबे की ओर से लगाए गए दो मेडिकल बिल को लेकर भी सवाल उठाए, जिस पर आपत्तियां लगीं थीं और इसकी जांच भी हुई थी। छात्रों ने यह दावा भी लगाया कि प्रो. दुबे पर बिल्वेडियर प्रेस, मोती लाल नेहरू रोड पर एक मकान पर कब्जे का आरोप लगा था और इसमें मुकदमा भी दर्ज है।
छात्रों का आरोप है कि कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू इन्हीं आरोपों का फायदा उठाते हुए प्रो. दुबे पर दबाव बनाते रहे हैं कि इविवि प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों के खिलाफ सीधे निलंबन और निष्कासन की कार्रवाई करें, जो वह कर रहे हैं। महामंत्री ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि उनके खिलाफ चीफ प्रॉक्टर की ओर से दी गई तहरीर में प्रॉक्टर ऑफिस मिलने गए छात्रों को महामंत्री का अनुयायी बताया गया। महामंत्री ने कहा कि प्रॉक्टर ऑफिस गए छात्र मेरे साथी हैं और वह मेरे साथ समर्थन के लिए गए थे। चीफ प्रॉक्टर को एक शिक्षक के नाते कम से कम अपनी भाषा संयमित रखनी चाहिए।
सभी आरोप बेबुनियाद, पहले जवाब दें महामंत्री
चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। पूर्व में भी उन्होंने अनुशासनहीनता में जिन छात्र नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की, सबने यही आरोप लगाए। आरोप लगाने वाले कहीं भी शिकायत करें, उन्हें कोई आपत्ति नहीं। महामंत्री शिवम सिंह पहले कारण बताओ नोटिस का जवाब दें, जिसके लिए उन्हें 31 मार्च तक का समय दिया है। अगर वह निर्धारित समय में नोटिस का जवाब नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जहां तक आंदोलन की बात है तो विश्वविद्यालय में परीक्षाएं चल रहीं हैं और धरना-प्रदर्शन जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित है। अगर कोई नियम तोड़ेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।