फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वास्थ्य : डेंगू का डंक छीन रहा आंखों की रोशनी, प्लेटलेट्स गिरने के बाद दो मरीजों में आई समस्या

Thu, 05 Oct 2023 06:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

विशेषज्ञों का कहना है कि जब डेंगू के कारण शरीर में प्लेटलेट्स 26 हजार के नीचे चला जाता है, तो कभी-कभी इंसान की आंख के पीछे अंदर ही अंदर खून का रिसाव शुरू हो जाता है। इससे आंख काली होकर आगे उभरने लगती है। इसे नेक्रोसिस कहा जाता है। इसमें आंख का विजन शून्य हो जाता है।
विज्ञापन
डेंगू संक्रमण का कहर - फोटो : istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

डेंगू का डंक अब आंखों की रोशनी छीनने लगा है। प्रयागराज में डेंगू के दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मरीज की आंखों की रोशनी चली गई। दोनों आंखों की रोशनी जाने के बाद एक मरीज को दिल्ली एम्स के लिए रेफर कर दिया गया। जबकि दूसरे का इलाज मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय में चल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब डेंगू के कारण शरीर में प्लेटलेट्स 26 हजार के नीचे चला जाता है, तो कभी-कभी इंसान की आंख के पीछे अंदर ही अंदर खून का रिसाव शुरू हो जाता है। इससे आंख काली होकर आगे उभरने लगती है। इसे नेक्रोसिस कहा जाता है। इसमें आंख का विजन शून्य हो जाता है। ऐसे में आंख को निकालकर उस स्थान पर पत्थर की आंख लगानी पड़ती है।

विज्ञापन


मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय के निदेशक और मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपने मेडिकल कॅरियर में डेढ़ लाख ऑपरेशन किए हैं। लेकिन उनके सामने पहली बार इस प्रकार के दो मामले सामने आए हैं, जिसमें डेंगू मरीज के आंख की रोशनी चली गई। उन्होंने बताया कि यह डेंगू रक्तस्रावी में स्क्लेरल नेक्रोसिस से जुड़ा पैनोफथालमिटिस है।

केस-  1

पहला मामला 14 अगस्त को मिला। प्रयागराज निवासी राजीव कुमार को आठ अगस्त को हैदराबाद में डेंगू हुआ। वह अपना इलाज कराने प्रयागराज आ गए। जिस समय वह मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय पहुंचे, उनकी दोनों आंखें काली पड़ने के बाद उभरकर बाहर आ चुकी थीं। जांच में पाया गया कि मरीज का प्लेटलेट्स गिरने के कारण उनकी आंख के पीछे से खून बहने लगा। उन्हें नेक्रोसिस हो गया था। दोनों आंखों से दिखना भी बंद हो चुका है। फिलहाल परिजन उन्हें रेफर कराकर इलाज के लिए दिल्ली के एम्स ले गए हैं।

केस - 2

मेजा खास के रहने वाले अजय कुमार को 24 सितंबर को तेज बुखार की शिकायत हुई। उन्हें मेजा सामुदायिक केंद्र ले जाया गया। जहां पर उनकी डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद परिजन उनका इलाज एक निजी अस्पताल में कराने लगे। इस दौरान उनका बुखार तो ठीक हो गया, लेकिन आंखों में दर्द होने लगा। दो अक्तूबर को परिजन उन्हें मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय लेकर पहुंचे।

विज्ञापन

डेंगू के कारण उनका प्लेटलेट्स गिरकर 26 हजार पहुंच गया। आंख के पीछे रक्तस्राव होने के कारण उनकी एक आंख काली होकर बाहर उभर आई। फिलहाल उनका इलाज मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय में चल रहा है। चिकित्सकों की मानें तो उनके दाएं आंख की रोशनी जा चुकी है।
 

डेंगू की नेत्र संबंधी अभिव्यक्तियां सबकोन्जंक्टिवल हेमरेज से लेकर ऑप्टिक न्यूरोपैथी तक होती हैं। डेंगू बुखार में पैनोफथालमिटिस एक दुर्लभ खोज है। इसमें आंखों में दर्द, लालिमा, सूजन और दृष्टि में नुकसान पहुंचता है। ऐसे में मरीज की आंख बाहर निकालकर उसकी जगह पत्थर की आंख लगाई जाती है। - डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज


दूसरे दिन भी मिले डेंगू के सात मरीज

 

डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच बुधवार को भी डेंगू के सात नए मरीज मिले। मरीजों की कुल संख्या 169 पहुंच गई है। पांच मरीजों में से एक कालिंदीपुरम, अलोपीबाग व झूंसी और दो मुंडेरा के हैं। जिला मलेरिया अधिकारी आनंद सिंह कहना है कि शहरी क्षेत्र में अब तक 128 डेंगू के मरीज पाए गए। वहीं ग्रामीण में कुल 41 मरीज हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें