यमुनापार इलाके के नारीबारी में रविवार सुबह प्रशासन के आदेश पर निर्माणाधीन फोरलेन के बगल में अपने घर की दीवार तोड़ रहे दो सगे भाई छत ढहने से मलबे के नीचे दब गए। उनमें एक भाई अरुण (25) की अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो गई जबकि छोटे भाई की हालत रात तक गंभीर बनी थी। उसे अस्पताल में भर्ती किया गया है। गुस्साए लोगों ने घटना के विरोध में रीवा मार्ग पर चक्काजाम कर मुआवजा की मांग की। करीब दो घंटे बाद एसडीएम ने आकर दुखी और आक्रोशित लोगों तो मुआवजा दिलाने का भरोसा दिया तब जाकर जाम खत्म हुआ।
इलाहाबाद में महेवा से चाकघाट तक फोरलेन हाइवे के निर्माण का काम चल रहा है। दो दिन पहले प्रशासन ने नारीबारी में निर्माणाधीन फोरलेन के दोनों तरफ की सीमा में चिह्नित मकानों को रविवार तक खुद तोड़ने का आदेश दिया। ऐसे में रविवार सुबह तमाम चिह्नित मकानों को लोग खुद तोड़ने में जुटे थे। दलित जग्गे के भी बेटे अरुण (25) और कन्हैया (17) तीन दोस्तों के साथ अपने मकान को तोड़ रहे थे। जग्गे को 1995 में इंदिरा आवास योजना के तहत एक कमरे का मकान मिला था। तोड़ते समय अचानक छत ढहने से अरुण और जग्गे मलबे में दब गए। चीख-पुकार मची तो आसपास अपने मकान तोड़ रहे लोग वहां जुट गए। अरुण और जग्गे को अस्पताल ले जाया गया जहां अरुण को डॉक्टरों ने मृत बता दिया।
अरुण की मौत और उसके भाई कन्हैया की गंभीर हालत से गुस्साए स्थानीय लोगों ने सड़क पर अवरोध रखकर चक्काजाम कर दिया। लोगों में इस बात का गुस्सा था कि उन्हें घर तोड़ने को कह दिया गया लेकिन मुआवजा नहीं मिला। ऊपर से बेटे की जान चली गई। करीब दो घंटे तक चक्काजाम के बाद एसडीएम बारा राजकुमार द्विवेदी वहां पहुंचे और लोगों से बात की। एसडीएम ने उन्हें भरोसा दिया कि जल्द ही मुआवजा दिया जाएगा। तब लोग शांत हुए तो पुलिस ने शव को सीलकर चीरघर भेजा। अरुण की मौत ने उसकी पत्नी और डेढ़ साल के बेटे गोलू को मुश्किल में डाल दिया।