दुखद यह है कि मरीजों को गॉल ब्लेडर कैंसर का पता चौथे चरण में चल पा रहा है। इससे इलाज में काफी मुश्किल आ रही है। इतना ही नहीं गॉल ब्लेडर कैंसर का प्रभाव सबसे ज्यादा महिलाओं पर है। 400 मरीजों में से 300 महिलाएं हैं। वहीं, कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल के चिकित्सकों की मानें तो महिलाओं में गॉल ब्लेडर की समस्या अधिक क्यों है और गंगेटिक बेल्ट में इस बीमारी का खतरा अधिक क्यों है, यह अभी भी शोध का विषय है।
गंगा में प्रदूषण के कारण इसके मामले बढ़ रहे हैं, यह फिलहाल परिकल्पना है। कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. सपन श्रीवास्तव के मुताबिक जल्द ही गॉल ब्लेडर के बढ़ते मामलों पर एक नए शोध की शुरूआत की जाएगी। इसको लेकर रूप-रेखा तैयारी की जा रही है। इस शोध में मुंबई के कैंसर विशेषज्ञों व रेडियोलॉजिस्ट की सहायता ली जाएगी।
ऐसे होगा शोध
कमला नेहरू अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञों द्वारा शुरू किए जा रहे शोध में साधारण जनसंख्या की स्क्रीनिंग व अल्ट्रासाउंड किया जाएगा। यह प्रक्रिया कई वर्षों तक चलेगी। इसके अलावा जिन मरीजों को गॉल ब्लेडर का कैंसर हुआ है उनकी भी अनुवांशिक जांच के आधार पर अध्ययन किया जाएगा।
जिले में गॉल ब्लेडर के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है, जो चिंता का विषय है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें और थोड़ी सी परेशानी महसूस होने पर चिकित्सक से संपर्क करें। - डॉ. सपन श्रीवास्तव, कैंसर रोग विशेषज्ञ, कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल