संगम नगरी को स्मार्ट सिटी घोषित किए जाने के बाद यहां जमीन की कीमत तेजी से बढ़ रही है। ट्रेजरी और निबंधन विभाग के आंकड़े यही संकेत दे रहे हैं। जिले की नौ तहसीलों में फूलपुर और सोरांव में वकीलों की हड़ताल के कारण माह भर से अधिक समय तक रजिस्ट्री का काम ठप रहा। इसके बावजूद वित्तीय वर्ष 2015-16 में विभाग को तीन अरब 72 करोड़ रुपये की आय हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 18 फीसदी अधिक है। शहर के बाद बाहरी क्षेत्रों में जमीन की सबसे ज्यादा खरीद-फरोख्त फूलपुर एवं सोरांव तहसील में होती है। अफसरों का मानना है कि वकीलों की हड़ताल न होती तो रजिस्ट्री से और अधिक आय होती।
इलाहाबाद में वर्ष 2015-16 में 78 हजार 971 रजिस्ट्रियां हुईं। इनसे कुल तीन अरब 72 करोड़ 76 लाख 73 हजार रुपये की आय हुई जबकि पिछले वर्ष 69 हजार 332 रजिस्ट्रियों से तीन अरब 13 करोड़ 50 लाख 64 हजार रुपये की आय हुई थी। रजिस्ट्रियों के अलावा मुकदमे आदि में स्टाम्प हुई आय को भी जोड़ लिया जाए तो ट्रेजरी से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 में कुल तीन अरब 87 करोड़ 51 लाख 46 हजार रुपये की कमाई हुई। वर्ष 2015-16 में सर्वाधिक 12857 रजिस्ट्रियां सदर-2 तहसील में हुईं। सदर-2 के कार्यक्षेत्र में बम्हरौली, नीम सराय सहित शहर पश्चिम का बड़ा हिस्सा शामिल है और इन इलाकों में प्लॉटिंग का काम सबसे तेज हो रहा है। रजिस्ट्री के मामले में दूसरे नंबर पर करछना तहसील है। यहां 12403 रजिस्ट्रियां हुईं। करछना में पावर प्लांट का निर्माण शुरू होने और तहसील में तमाम बड़ी योजनाओं की घोषणा होने के बाद यहां भी जमीन की मांग तेजी से बढ़ी है।
शहर में जमीन बहुत कम बची है, सो ज्यादातर लोग करछना, फूलपुर और सोरांव तहसील में जमीन खरीद रहे हैं। निबंधन विभाग के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। रजिस्ट्री के मामले में तीसरे नंबर पर फूलपुर तहसील रही, जहां वर्ष 2015-16 में कुल 11680 रजिस्ट्रियां हुईं जबकि फूलपुर में वित्तीय वर्ष के अंत में एक माह से अधिक समय तक हड़ताल रही और रजिस्ट्री का काम पूरी तरह से ठप रहा। फूलपुर के साथ सोरांव में भी हड़ताल के कारण एक माह तक रजिस्ट्रियां नहीं हुईं। इसके बावजूद रजिस्ट्री के मामले में सोरांव तहसील चौथे नंबर पर रही। वहां 9271 रजिस्ट्रियां हुईं। इसके अलावा सदर-1 तहसील में 8818, हंडिया में 8628, मेजा में 4435, बारा में 6584 और कोरांव तहसील में 4295 रजिस्ट्रियां हुईं।