हरिद्वार कुंभ में भूमि आवंटन से शुरू हुई संन्यासी और वैरागी अखाड़ों के बीच की खींचतान अध्यक्ष पद के चुनाव के एलान के बाद और भी बढ़ गई है। वैष्णव संप्रदाय के तीन वैरागी अखाड़े चाहते हैं कि अध्यक्ष उनके बीच से चुना जाए। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री के दोनों पद पिछले 10 वर्ष से संन्यासी परंपरा के संतों के ही पास हैं। जबकि, इसमें से एक पद वैरागियों को दिया जाना चाहिए।
अब बदले परिदृश्य में कुछ संतों का कहना है कि चूंकि नरेंद्र गिरि निरंजनी अखाड़े से थे, इसलिए इस बार सहानुभूति के आधार पर निरंजनी से ही नया अध्यक्ष चुना जाना चाहिए। इस आधार पर निरंजनी अखाड़े के ताकतवर संतों में शामिल महंत रवींद्र पुरी का नाम आगे चल रहा है। कहा जा रहा है कि रवींद्र पुरी को अध्यक्ष बनाने के लिए सात से अधिक अखाड़े समर्थन में आ गए हैं। जबकि, महानिर्वाणी अखाड़े ने अपने पक्ष में समर्थन जुटाना शुरू कर दिया है।
जूना अखाड़ा भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल है। उधर, वैष्णव अखाड़ों ने पहले ही साफ कर दिया है कि अध्यक्ष पद उन्हें नहीं दिया गया तो वे अखाड़ा परिषद से अलग हो जाएंगे। आपस की दूरी इस कदर बढ़ती जा रही है कि हाल में ही महंत नरेंद्र गिरि के षोडशी भंडारे से भी वैरागी अखाड़ों ने दूरी बना ली थी। दिगंबर अनी, निर्मोही अनी और निर्वाणी अनी अखाड़े के संत षोडशी में हिस्सा न लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।