यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने शिकायतकर्ता याची मोहम्मद इश्तियाक खान की ओर से आरोपी बृजपाल सिंह भदौरिया को दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त करने की मांग वाली याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत निरस्त करते हुए कहा कि अदालत को गुमराह कर हासिल किया गया आदेश खंडनीय है। कोई भी पीड़ित पक्ष ऐसे आदेश को रद्द करने की अर्जी किसी भी स्तर पर दे सकता है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने शिकायतकर्ता याची मोहम्मद इश्तियाक खान की ओर से आरोपी बृजपाल सिंह भदौरिया को दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त करने की मांग वाली याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
मामला मैनपुरी जिले के कुर्रा थाना क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता ने वर्ष 2022 में संपत्ति की खरीद फरोख्त में हुए धोखाधड़ी के आरोप में बृजपाल सिंह भदौरिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की थी, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार करते हुए आरोपी के पक्ष में अग्रिम जमानत मंजूर कर ली थी।
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आरोपी को मिली अग्रिम जमानत को चुनौती देते हुए शिकायतकर्ता याची ने कहा कि आरोपी सात आपराधिक मामलों में संलिप्त है। लेकिन, उसने अदालत को गुमराह करने के उद्देश्य से अपने आपराधिक इतिहास का खुलासा जमानत अर्जी में नही किया। आरोपी द्वारा वास्तविक तथ्यों को छुपा कर जमानत का आदेश हासिल किया गया है, जो निरस्त किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट द्वारा आरोपी को दी गई जमानत निरस्त कर दी। हालांकि, कोर्ट ने आरोपी को निचली अदालत में समर्पण करते हुए नियमित जमानत अर्जी दाखिल करने की छूट दी है। कोर्ट ने निचली अदालत को आरोपी की जमानत अर्जी सत्येंद्र कुमार अंटील के वाद में स्थापित विधि व्यवस्था के आलोक में निस्तारित करने का आदेश भी दिया है।