नैनी, प्रयागराज स्थित कंपनी त्रिवेणी स्ट्रक्चरल लि. के समापन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। साथ ही कंपनी के कर्मचारियों का बकाया वेतन, भविष्य निधि, बीमा, अवकाश नकदीकरण, ग्रेच्युटी आदि के भुगतान की जवाबदेही तय करने की मांग में याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका सुनवाई के लिए 15 अप्रैल को पेश करने का निर्देश दिया है और भारत सरकार व अन्य विपक्षियों से जवाब मांगा है। कंपनी के कर्मचारी अमरनाथ विश्वकर्मा की याचिका पर न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं।
याची के अधिवक्ता एएन त्रिपाठी का कहना है कि सरकारी कंपनी के बीमार होने पर कर्मचारियों के वेतन आदि के भुगतान की जिम्मेदारी भारत सरकार और होल्डिंग कंपनी भारत यंत्र निगम की होती है। जिसके लिए उन्हें निर्देश दिया जाए। याची अधिवक्ता का यह भी कहना है कि बीआईएफआर का कार्य बीमार कंपनी को पुनर्जीवित करने का सुझाव देना है। वह कंपनी के समापन की राय नहीं दे सकती। कंपनी एक्ट में किसी कंपनी के समापन के छह तरीके बताए गए है। जिसमें बीएफआईआर की संस्तुति पर समापन का उपबंध नहीं है। इसलिए कंपनी के समापन की कार्यवाही विधि सम्मत नहीं है।
त्रिवेणी स्ट्रक्चरल कंपनी भारत सरकार की कंपनी है और भारत यंत्र निगम का त्रिवेणी स्ट्रक्चरल में 50 फीसदी शेयर है। भारत यंत्र निगम होल्डिंग कंपनी है और कार्यरत है। मूल कंपनी के रहते सबसिडियरी कंपनी का समापन नहीं किया जा सकता। कर्मचारियों के बकाए के भुगतान की जिम्मेदारी भारत सरकार व भारत यंत्र निगम दोनों की है और समापन कार्यवाही विधि विरुद्ध होने के कारण समाप्त की जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।