फर्जी वेबसाइट के जरिए जाली ई रवन्ना जारी कर सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगाने वाले मेजा के चार युवकों की गतिविधियां पहले से संदिग्ध थीं।। शक के आधार पर ही करीब दो साल पहले भी उनकी दुकान पर छापा मारा गया था। लेकिन सबूतों के अभाव मेें उन्हें छोड़ दिया गया था। उनकी गिरफ्तारी सोमवार को दिन भर क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही।
बता दें कि एक दिन पहले मेजा खास निवासी मुकेश कुमार केसरी, मनोज कुमार केसरी, अंकित कुमार केसरी और विशाल कुमार केसरी को लखनऊ साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। दावा किया था कि चारों फर्जी वेबसाइट बनाकर जाली ई रवन्ना कम दामों में ट्रक मालिकों को थमाते थे। जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ। पकड़े गए चारों युवक मेजा तहसील के पास फोटोस्टेट व जनसुविधा केंद्र चलाते थे।
उनके कारनामे के बारे में सुनकर सभी स्तब्ध हैं लेकिन यह भी पता चला है कि उनकी गतिविधियां पहले से संदिज्ध थीं। दो साल पहले भी उनके बारे में सूचना मिली थी कि वह जाली ई रवन्ना तैयार करते हैं। जिसके बाद तत्कालीन एसडीएम जे रिभा ने मनेाज व मुकेश की फोटोस्टेट की दुकान पर छापा मारा था। लेकिन मौके से बरामदगी नहीं होने के कारण बगैर कार्रवाई के ही टीम को लौटना पड़ा था। उधर परिवारवाले मामले में कुछ बोलने को तेयार नहीं हुए।