दो महीने तक बंधा रहा हाथी
बस्ती के 75 वर्षीय मुश्ताक और 62 वर्षीय कामरान खान बताते हैं कि मेले में भड़के एक हाथी को परेड की ओर से भगाकर झूंसी लगाया गया था। तब उसे हमारे गांव की मुसलिम बस्ती के विशालकाय नीम के पेड़ में बांधा गया था। बिगड़ा हाथी तकरीबन दो महीने तक उसी पेड़ में बंधा रहा। तब बस्ती के मुसलिमों ने हाथी की खुराकी के साथ ही महावत और अन्य लोगों के खाने का इंतजाम दो महीने तक किया था। मेला संपन्न होने पर महावत उसे लेकर गए थे।
दशकों बाद आज भी नीम का वह विशालकाय पेड़ मुसलिम बस्ती में शान के साथ खड़ा है। उल्लेखनीय है कि शाही स्नान के दौरान हाथी के भड़कने की घटना का प्रशासन कड़ा संज्ञान लिया था। यही वजह है कि अब सार्वजनिक समारोहों और भीड़ वाले आयोजनों में हाथी की सवारी प्रतिबंधित कर दी गई है। यही वजह है कि पथरचट्टी और अन्य ऐतिहासिक रामदल की शोभायात्राओं में अब आर्टिफिशियल हाथी का इस्तेमाल किया जाने लगा है।