इलाहाबाद हाईकोर्ट में टीजीटी अंग्रेजी विषय की भर्ती परीक्षा के विवादित प्रश्नों के मामले में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि जिन 37 प्रश्नों के पाठ्यक्रम से बाहर होने के आरोप लगे थे उनमें से विशेषज्ञ समिति ने 29 प्रश्नों को पाठ्यक्रम से बाहर माना है।
हालांकि, चार अन्य प्रश्नों को गलत बताए जाने संबंधी अभ्यर्थियों की आपत्तियों को विशेषज्ञ समिति ने स्वीकार नहीं किया। आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि वह विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर दाखिल करेंगे।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की अदालत ने आदित्य कुमार सिंह एवं 17 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर दिया। याचियों ने आरोप लगाया है कि टीजीटी अंग्रेजी विषय की परीक्षा के प्रश्न संख्या तीन, 11, 12 और 100 गलत हैं। इसके अलावा याचिका के पैरा-31 में उल्लिखित 37 प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए हैं। इसी विवाद को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
याचियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि सामान्यतः अदालत विशेषज्ञ समिति की राय पर विशेषज्ञ की तरह विचार नहीं करती लेकिन यदि रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि दिखाई देती है तो न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद याची अपनी आपत्तियां दाखिल करेंगे और यह भी स्पष्ट करेंगे कि किन परिस्थितियों में अदालत विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में हस्तक्षेप कर सकती है।
इससे पहले सुनवाई के दौरान आयोग के अधिवक्ता हाईकोर्ट के निर्देश के क्रम में मांगी गई जानकारी प्रस्तुत नहीं कर सके थे। तब याचियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी थी कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है और समय रहते सुनवाई नहीं होने पर उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने आयोग को आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था और चेतावनी दी थी कि आदेश का पालन न होने पर आयोग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले को 20 जुलाई 2026 को दोपहर 12:30 बजे पुनः सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।