बर्फीली हवाएं ठंड का कहर बढ़ा रही हैं। सोमवार इस सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा। अधिकतम तापमान करीब तीन डिग्री सेल्सियस लुढ़कने से शीतलहरी बढ़ गई है। सुबह घना कोहरा फिर दिन भर धुंध के बीच सूरज छिपा रहा। दिन में दो बजे निकली हल्की धूप बेअसर रही। वातावरण में नमी का स्तर सौ फीसदी होने से गलन हाड़ कंपा रही है। हाईवे पर दृश्यता कम रहने से दिन भी वाहन चालक हेड लाइट जलाकर चले।
पछुआ हवाओं की तेजी लगातार बनी है। धुंध में छिपे सूरज की सुस्ती वातावरण में 100 फीसदी नमी का कारण रही। दिन और रात के तापमान में मामूली अंतर गलन के असर को बढ़ा रहा है। सुबह कोहरा फिर दिन भर छाई रही धुंध से दृश्यता प्रभावित हुई। धुंध और कोहरा लोगों की राह में बाधा बना है। हाईवे पर चलने वालों ने वाहनों की हेडलाइट जलाई। गंगा के मैदानी इलाकों में धुंध छाई रही। इसके बावजूद मेला क्षेत्र में कल्पवास के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ कम नहीं हुई।
दिसंबर के अंत में शुरू पछुआ विक्षोभ का दूसरा चरण जनवरी में भी ठंड का कारण बना है। नए साल के पहले दिन हिमालय और हिमाचल से बर्फीली हवाएं शीतलहरी का प्रकोप बढ़ाती रहीं। रात का तापमान सोमवार को करीब दो डिग्री सेल्सियस लुढ़ककर 8.9 डिग्री और दिन का पारा भी धड़ाम हो गया। सोमवार को अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस होने से इस सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा। जबकि रविवार को दिन का पारा 18.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। न्यूनतम पारा 8.9 डिग्री सेल्सियस रहा। इस कारण सुबह देर तक कोहरा छाया रहा। अधिकतम आर्द्रता 100 फीसदी और न्यूनतम 91 फीसदी दर्ज की गई। इससे गलन का प्रकोप बढ़ा है।
सर्द भरे दिन में सोमवार को सड़कों पर निकले लोग स्वेटर, जैकेट शरीर पर डाले मफलर या टोपी लगाए रहे। लोग बच्चों को भी टोपी, स्वेटर पहनाकर ही बाहर लाए। नववर्ष मनाने के लिए भी लोग निकले। बाजार और चंद्रशेखर आजाद और हाथी पार्क में भीड़ रही। पार्कों में बच्चों ने झूले झूले तो बड़ों ने साथ लाए खाने-पीने के सामान लाकर पिकनिक मनाई। मेला क्षेत्र में छाई धुंध और बर्फीली ठंडी हवाओं से लोग कांपते रहे। जहां अलाव जलते मिले लोगों ने हाथ सेंके और सर्दी से राहत पाने का प्रयास किया। अधिकांश घरों में ब्लोवर-हीटर चलाए गए लेकिन अलाव या कच्चा कोयला जलाने वालों की तादात ज्यादा रही।
मौसम विज्ञानी प्रोफेसर एसएस ओझा के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ का असर मौसम पर है। उन्होंने बताया कि दक्षिणी गोलार्ध के आसपास सूरज 44 डिग्री का कोण बना रहा है। ऐसी स्थिति में सूरज का ताप बेअसर होने से बर्फीली हवाएं पारा गिराने का कारण बनती हैं। उन्होंने संभावना जताई है कि ठंड का प्रकोप अभी बना रहेगा।
कड़क की ठंड से बचाव को बाजार में जैकेट, स्वेटर, टोपी, मफलर, दस्ताने आदि की बिक्री बढ़ गई है। होजरी के थोक विक्रेताओं के पास टोपी-मफलर, दस्ताने और इनर का स्टाक समाप्त हो गया है। चौक बाजार में टंडन भइया ऊन वाले के मालिक मोहन जी टंडन के मुताबिक बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार की टोपियों की खास मांग है। बाजार में आने वाले जाड़े से बचाव के लिए इनर और लोवर खरीद रहे हैं। बाजार में टोपी-मफलर, दस्ताने की मांग बढ़ने से फुटपाथिया दुकानदारों ने मुंहमांगे दाम वसूलने का काम शुरू कर दिया है।