मां केवल जन्म ही नहीं देती, वह कठिन परिस्थितियों में परिवार की ताकत बनकर बच्चों के सपनों को भी नया आसमान देती है। सिविल लाइंस निवासी अध्यापिका पूनम कुमारी ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया। पति के निधन के बाद उन्होंने खुद को संभाला और अपने दोनों बच्चों का भविष्य संवारने में पूरी ताकत झोंक दी। इसी तपस्या का परिणाम है कि बेटी निवेदिता चंद्रा आज आईएएस हैं।
मदर्स डे पर पूनम कुमारी जैसी माताएं उन लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने बच्चों के सपनों को टूटने नहीं देतीं।
पूनम कुमारी की शादी वर्ष 1990 में जिला समाज कल्याण अधिकारी रहे दीनानाथ से हुई थी। परिवार खुशहाल था। एक बेटा और एक बेटी के साथ जीवन सामान्य ढंग से चल रहा था। वर्ष 2010 में पूनम प्राथमिक विद्यालय में अध्यापिका बनीं।
बेटी निवेदिता शुरू से ही मेधावी रहीं। उन्होंने वर्ष 2013 में हाईस्कूल और 2015 में इंटरमीडिएट की परीक्षा शिक्षा गर्ल्स हाईस्कूल एंड कॉलेज से उत्तीर्ण की और दोनों बार स्कूल टॉपर रहीं। बाद में बीआईटी मेश्रा रांची से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की।
इसी बीच नवंबर 2021 में डेंगू की चपेट में आने से पिता दीनानाथ का निधन हो गया। उस कठिन दौर में पूनम ने खुद को संभालते हुए बच्चों के सामने कभी कमजोरी जाहिर नहीं होने दी। उन्होंने मां के साथ पिता की भूमिका भी निभाई।
पूनम के संघर्ष और प्रेरणा का असर ही था कि वर्ष 2022 में निवेदिता का चयन यूपीपीएससी परीक्षा में डिप्टी एसपी पद पर हुआ। इसके बाद वर्ष 2023 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल कर वह आईआरएमएस (ट्रैफिक) में चयनित हुईं। लगातार मेहनत जारी रखते हुए उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 855 वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया। बेटे मिलिंद चंद्रा ने भी दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक मशीन निर्माण से जुड़ी कंपनी स्थापित की।
पूनम कुमारी कहती हैं कि पति के निधन के बाद उन्होंने यह तय कर लिया था कि बच्चों को कभी किसी कमी का एहसास नहीं होने देंगी।