कोर्ट में याची ओर से तर्क दिया गया कि उसे झूठा व रंजिशन फंसाया गया है। घटना से उसका कोई लेना-देना नहीं है। मामले में सह अभियुक्तों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध किया।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र अनुराग सिंह उर्फ मोहर के खिलाफ कर्नलगंज थाने में दिसंबर 2020 में दर्ज हुई प्राथमिकी में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत दे दी है। हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी मंजूर करते हुए याची को रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि याची को निजी मुचलके और दो प्रतिभूतियों पर रिहा किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने अनुराग सिंह उर्फ मोहर की जमानत अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है।
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कोर्ट में याची ओर से तर्क दिया गया कि उसे झूठा व रंजिशन फंसाया गया है। घटना से उसका कोई लेना-देना नहीं है। मामले में सह अभियुक्तों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध किया।
कहा कि याची के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। हालांकि, कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याची को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। मामले में याची के खिलाफ कर्नलगंज थाने में आईपीसी की धारा 147 148 149 323 504 506 307 और एसटी एससी एक्ट में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। याची तब से जेल में है।