टीजीटी संस्कृत सहित कई विषयों के परीक्षार्थी कोर्ट जाने की तैयारी में
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की टीजीटी संस्कृत सहित कई अन्य विषयों के सवालों पर परीक्षार्थियों की आपत्ति के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। अमर उजाला में इस संबंध में समाचार प्रकाशित होने और परीक्षार्थियों के चयन बोर्ड पर प्रदर्शन के बाद अध्यक्ष की ओर से आश्वासन मिला था कि उनकी शिकायतों पर विचार किया जाएगा। चयन बोर्ड में लिखित शिकायत दर्ज करवा देने के बाद भी चयन बोर्ड की खामोशी से परीक्षार्थियों में बेचैनी है। चयन बोर्ड की ओर से परीक्षार्थियों की शिकायत को लेकर खामोशी के बाद अब परीक्षार्थी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने जा रहे हैं। इस संबंध में परीक्षार्थियों ने अपने वकील से मिलकर याचिका दसखिल करने की तैयारी कर ली है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्डकी ओर से 25 अक्तूबर को घोषित टीजीटी संस्कृत के परिणाम को लेकर परीक्षार्थियों ने आपत्ति उठाई है। आपत्ति दर्ज कराने वाले अभ्यर्थियों ने चयन बोर्ड के अध्यक्ष वीरेश कुमार से मिलकर अपनी शिकायत की थी। शिकायत के बाद अध्यक्ष ने परीक्षार्थियों को आश्वस्त किया था कि वह कोर्ट में याचिका की बात कर रहे लोगों से कहा कि वह इंतजार करें, अन्याय नहीं होगा। इसके बाद से परीक्षार्थी शांत हो गए, शिकायत के 15 दिन से अधिक का समय बीत जाने के बाद अब परीक्षार्थियों में चयन बोर्ड की खामोशी से बेचैनी हो रही है।
परीक्षार्थियों ने आरोप लगाया कि कि टीजीटी संस्कृत के 2013 के परिणाम में इसी प्रकार से आपत्ति करने पर हाईकोर्ट के आदेश पर कई अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में पास तो किया गया परंतु सफलता कुछ ही लोगों को ही मिली। चयन बोर्ड ने कोर्ट के आदेश पर सफल हुए किसी अभ्यर्थी को लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों के बारे में जानकारी नहीं दी। आयोग ने परीक्षार्थियों की आपत्ति से पहले पांच प्रश्नों के जवाब संदिग्ध होने पर उनको मूल्यांकन से बाहर कर दिया है। परीक्षार्थियों का कहना है कि यदि उनका साक्ष्य माना जाता है तो परीक्षा में सफलता मिलने के साथ कई सफल अभ्यर्थी बाहर हो जाएंगे।