ten days of investigation in corona soldier angre
कोरोना की जांच कराने में एक सिपाही को 10 दिन लग गए। इस बात को लेकर शनिवार को उसने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से नाराजगी जताई और कहा कि वह पॉजिटिव नहीं है और इतने दिनों तक क्वारंटीन सेंटर में रहने से वह संक्रमण की चपेट में आ सकता है। हालांकि, थोड़ी देर बाद ही सिपाही की रिपोर्ट आ गई और उसे क्वारंटीन सेंटर से छुट्टी दे दी गई।
सिपाही कामेश्वर ने बताया कि उनकी सास की तबीयत खराब थी और वह दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थीं। वह दिल्ली देखने गया था। इसके बाद लाकडाउन हो गया। वहां एक परिचित की बाइक लेकर यहां आया। वह बहरिया थाने गया, लेकिन वहां आमद न होने पर पुलिस लाइन चला गया। वहां से उसे जांच कराने के लिए कहा गया। वह एसआरएन कोरोना ओपीडी में भी गया था। चिकित्सक ने होम क्वारंटीन की सलाह दी थी, लेकिन पुलिस लाइन में उसे जांच कराने को कहा गया। पांच मई को वह कालिंदीपुरम गया था। छह मई को स्वाब सैंपल लिया गया। बताया कि
उसके साथ 46 लोगों के और नमूने लिए गए थे। पांच दिन तक रिपोर्ट ही नहीं आई, जबकि 24 घंटे में रिपोर्ट आने की बात कही गई थी। रिपोर्ट न आने पर 11 मई को उसका दोबारा स्वैब सैंपल लिया गया। उसके पांच दिन बाद शनिवार को रिपोर्ट आई, तब जाकर उसे छुट्टी मिली। कालिंदीपुरम में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों के मुताबिक वहां 41 लोगों के स्वाब सैंपल की रिपोर्ट ही नहीं आई है। उधर, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह का कहना यह मामला उनकी जानकारी में नहीं है। जांच कराई जाएगी।
प्रवासी लोगों को 21 दिन रहना होगा होम क्वारंटीन
प्रदेश के दूसरे जिलों और प्रदेश के बाहर से आ रहे प्रवासी लोगों को अब 21 दिनों तक होम क्वारंटीन रहना होगा। स्वास्थ्य विभाग की पहले की गाइडलाइन के मुताबिक लोगों को 14 दिनों तक के लिए क्वारंटीन किया जाता था। लेकिन अब प्रवासियों को 21 दिन तक क्वारंटीन रहना होगा। अपर निदेशक स्वास्थ्य के मुताबिक अब 21 दिनों तक का ही होम क्वारंटीन का निर्देश आया है।