एडीए ने रविवार को स्टैनली रोड पर नजूल भूमि पर एक तहसीलदार द्वारा अवैध रूप से बनाए गए लॉज को ध्वस्त कर दिया। भारी-भरकम लॉज में 48 कमरों समेत करीब पांच सौ मीटर क्षेत्रफल में बना शेड भी गिराया गया। शेड तोड़ने के दौरान भीतर रखा बम फटने से अफरातफरी मच गई। इससे करीब पंद्रह मिनट कार्य बाधित रहा। कार्रवाई का विरोध करने वालों ने एडीए अफसरों और प्रवर्तन दल पर पथराव कर दिया। इससे वहां भगदड़ मच गई। पुलिस ने बवाल करने वालों को लाठीचार्ज कर खदेड़ा।
स्टैनली रोड पर नजूल की करीब ढाई बीघा जमीन पर लोगों ने कब्जा कर मकान बना लिए हैं। लखनऊ रोड की इस कीमती जमीन पर पिछले दिनों एक बिल्डिंग का निर्माण शुरू कराया गया। नोटिस और रोक के बावजूद प्रतापगढ़ में तैनात तहसीलदार संतोष कुमार सोनकर ने 48 कमरे के लॉज का भी निर्माण करा लिया। फिर कमरे किराए पर उठा दिए। एडीए ने शासन से लिखापढ़ी के बाद लॉज के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था।
एडीए के जोनल अधिकारी आलोक पांडेय के नेतृत्व में प्रवर्तन दल, एसीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कई थानों की पुलिस और पीएसी बल दिन करीब 11 बजे दो जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचे। लॉज में किराए पर रहने वालों को कमरे खाली करने के लिए एक घंटे का समय दिया गया। फिर तोड़ू दस्ता जैसे ही सड़क किनारे बने बड़े शेड को गिराने लगा भीतर रखा एक बम फट गया। इससे अफरातफरी मच गई। कार्रवाई में लगे लोगों के पीछे हटने से करीब पंद्रह मिनट कार्रवाई बाधित रही। कार्रवाई फिर शुरू होती इससे पहले वहां जुटे लोग विरोध करने लगे।
अफसर उन्हें समझाने लगे तो पीछे हल्ला मचा रही भीड़ ने ईंट-पत्थर चलाए। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस और पीएसी ने लोगों को लाठी पटक खदेड़ दिया। शेड तोड़ने के बाद दोनों जेसीबी अवैध रूप से बने लॉज ध्वस्त किया जाने लगा। शाम करीब पांच बजे तक चली कार्रवाई में अवैध लॉज और शेड तोड़ दिया गया। जोनल अफसर आलोक पांडेय के मुताबिक स्टैनली रोड पर नजूल भूमि पर कब्जा कर कई भवन बना लिए गए हैं। इनमें प्रतापगढ़ में तैनात तहसीलदार संतोष कुमार सोनकर भी शामिल हैं। उनका लॉज गिरा दिया गया है। अन्य भवन स्वामियों को नोटिस जारी की गई है। कार्रवाई के दौरान एसीएम, सीओ कर्नलगंज, कई थानों की फोर्स, पीएसी के साथ एडीए प्रवर्तन दल, जेई और भवन निरीक्षक मौजूद रहे।
नजूल भूमि पर बनाया गया तहसीलदार संतोष सोनकर का लॉज तो गिरा दिया लेकिन वहीं खड़ा उनका आलीशान मकान एडीए को मुंह चिढ़ा रहा है। इसके अलावा इस नजूल भूमि पर कई अवैध मकान बने हैं। स्थानीय लोगों का विरोध भी इसी बात को लेकर है कि उनके पास जमीन के कागज हैं। भवन निर्माण के समय तो उन्हें नहीं रोका गया लेकिन अब मेहनत की कमाई लगाकर मकान बनाकर वे लोग रहने लगे तो उन्हें नोटिस जारी की जा रही है।
एडीए की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान बम फटने से दहशत फैल गई। कार्रवाई में लगे कर्मचारी और जेसीबी चालक भी कूदकर भाग निकले। धुआं छटा तो पुलिस ने खोजबीन शुरू की। बम निरोधक दस्ते को भी बुलाया गया। माना जा रहा है कि कार्रवाई की जानकारी होने पर शरारत के तहत किसी ने दहशत फैलाने के लिए देसी बम रख दिया। पुलिस जब निश्चिंत हो गई कि अब शेड या लॉज के कमरों में बम या विस्फोटक नहीं है तब दोबारा कार्रवाई शुरू की गई।