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अब क्लीनिक नहीं सर्वेंट क्वार्टर में देख रहे मरीज

Mon, 10 Apr 2017 02:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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Doctor shimla
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सीएम योगी के कड़े रुख से प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टर सकते में हैं। डॉक्टरों की खुफिया निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने इसके लिए पांच टीमों का गठन किया है। इसकी भनक लगते ही नर्सिंग होम से सरकारी डॉक्टरों के बोर्ड हटा दिए गए हैं। डॉक्टर फोन पर अपनी लोकेशन नहीं दे रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं कि पकड़े जाने के खौफ से सरकारी आवास के सर्वेंट क्वार्टर में गुपचुप तरीके से मरीजों को देख अभी भी भारी फीस वसूलने से बाज नहीं आ रहे हैं।
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पीएचसी-सीएचसी और मेडिकल कॉलेज में तैनात ऐसे चिकित्सकों की सूची पहले से ही तैयार है, जो खुलेआम निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं। चिह्नित डॉक्टर ड्यूटी से गायब रहने के मामले में बदनाम हैं। ये सूची करीब चार साल पहले कमिश्नर ने तैयार कराई थी। शासन से पूछताछ हो, इससे पहले मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और सीएमओ इन फाइलों की धूल झाड़कर अध्ययन कर रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों का निरीक्षण इसी का पूर्वाभ्यास माना जा रहा है।

बेखौफ होकर प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले मेडिकल कॉलेज के कई बड़े नामचीन डॉक्टर शासन के रुख से सकते में हैं। जिन डॉक्टरों के नर्सिंग होम हैं, वहां उनके नाम से टंगे बोर्ड हटा लिए गए हैं। इसी तरह सीएचसी-पीएचसी में तैनात अधिकांश चिकित्सकों की फोन पर लोकेशन नहीं मिल रही है। डॉक्टरों को भनक लग गई है कि प्रशासन ने उनकी खुफिया निगरानी शुरू करा दी है। इसके लिए पांच टीमें गठित की गई हैं। सरकारी आवास पर मरीज देखने का काम फिलहाल बंद कर दिया गया है। पुराने भरोसेमंद मरीजों को सर्वेंट क्वार्टर में देखने की बात सामने आई है। पर्चे पैड पर नहीं, सादे पन्ने पर लिखे जा रहे हैं। मरीजों को बताया जा रहा है कि जरूरत हो तो सरकारी पर्चा लेकर आएं।
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कर्नलगंज स्थित एक बड़े निजी अस्पताल में बैठने वाले सरकारी डॉक्टर गाड़ियां बदलकर आ-जा रहे हैं। इसी तरह पन्ना लाल रोड स्थित नर्सिंग होम में साइड के खुफिया रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है। कचहरी चौराहा स्थित नर्सिंग होम में अपनी दुकान चलाने वाले सरकारी डॉक्टर दो पहिया वाहन से आकर तीसरी मंजिल के कमरे में चिह्नित मरीजों को ही देख रहे हैं। फिलहाल बदली परिस्थिति में चार दिन से मरीज भटक रहे हैं। जिन्हें डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनकी पड़ताल और पहचान नर्सिंग होम या डॉक्टरों के आवास पर तैनात कर्मचारियों से कराई जा रही है। भटक रहे मरीजों को तभी राहत मिलेगी, जब अस्पतालों की ओपीडी में वरिष्ठ चिकित्सक निश्चित समय से बैठें। शासन क्या कार्रवाई करेगा, यह अभी तय नहीं है लेकिन तय है कि अस्पतालों की ओपीडी में भीड़ बढ़ेगी।

मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह के मुताबिक प्राइवेट प्रैक्टिस पहले से ही प्रतिबंधित है। विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि चिकित्सकों की ओपीडी में उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। इस बारे में शासन के निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा। शीघ्र ही चिकित्सकों की बैठक बुलाई जाएगी। वहीं सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने बताया कि प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालों को चिह्नित कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। स्वास्थ्य केंद्रों से गायब रहने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संस्तुति शासन से की जाएगी।
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