यूपी बोर्ड परीक्षा पेपर लीक प्रकरण में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए बलिया के डीआईओएस बृजेश मिश्रा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर हैं। ईडी की टीम ने उनकी संपत्तियों की छानबीन शुरू कर दी है। यह भी पता लगाया जाएगा कि इन संपत्तियों को अर्जित करने में उनकी आय का स्रोत का क्या रहा। संपत्तियां आय से अधिक होने की बात सामने आती है तो उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी दर्ज किया जा सकता है।
30 मार्च को बलिया में द्वितीय पाली में होने वाली इंटरमीडिएट अंग्रेजी विषय की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया था। 316 ईडी और 316 ईआई सीरीज के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में कुल 24 जनपदों की परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। इसके अलावा डीआईओएस बृजेश मिश्रा को निलंबित कर दिया गया था।
कुछ देर बाद ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया गया था और फिर कोतवाल की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। डीआईओएस की ओर से अवैध रूप से संपत्तियां अर्जित करने से संबंधित खबरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। लेकिन इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। फिलहाल इन आरोपों को ईडी ने बेेहद गंभीरता से लिया है।
उसकी ओर से निलंबित डीआईओएस की संपत्तियों के संबंध में छानबीन शुरू कर दी गई है। पता लगाया जा रहा है कि जो संपत्तियां डीआईओएस या उनके परिवारीजनों के नाम पर है, उसे बनाने के लिए आय का स्रोत क्या रहा।
ईडी सूत्रों का कहना है कि अगर इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो ईडी की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग का भी केस दर्ज किया जा सकता है। यह भी पता चला है कि ईडी द्वारा बलिया पुलिस से डीआईओएस के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी मांगी गयी है।
आलीशान बंगले से जुड़ा था नाम
निलंबित डीआईओएस प्रयागराज में भी तैनात रह चुके हैं। 2007 से 2009 तक वह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात थे। इस दौरान सिविल लाइंस में स्थित एक आलीशान बंगले को लेकर वह खासा चर्चित रहे। इसमें भारी मात्रा में नकदी होने की सूचना पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने छापा भी मारा था। पेपर लीक मामले में जेल भेजे जाने के बाद उनको लेकर जिले में भी चर्चाओं का बाजार फिर से गर्म हो गया।