रोस्टर पर फर्जी हस्ताक्षर के जरिये कई टीटीई के घर बैठे वेतन एवं अन्य भत्ते लिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में पिछले माह निलंबित हुए सीआइटी रोस्टर एसके पांडेय ने अब मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) समेत रेलवे के वरिष्ठ अफसरों को शिकायती पत्र दिया है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने प्रयागराज मंडल के वाणिज्य विभाग के एक वरिष्ठ अफसर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा कि उक्त अफसर के खिलाफ उसके पास कुछ साक्ष्य हैं, जिसे वह सीबीआई को ही सौंपेंगे।
प्रयागराज मंडल के डीआरएम मोहित चंद्रा को भेजे गए शिकायती पत्र में एसके पांडेय ने वाणिज्य विभाग के एक अफसर के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। सीआईटी रोस्टर ने कहा कि उन्हें बिना कारण बताए ही निलंबित कर दिया गया। शिकायती पत्र में कहा कि अफसर उनसे रुपये की मांग करते थे। उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति न कर पाने की वजह से जन परिवाद निरीक्षक से उनकी जांच करवाई गई, जबकि जन परिवाद निरीक्षक उनकी जांच के लिए अधिकृत नहीं थे।
क्योंकि एक वरिष्ठ अफसर की जांच कनिष्ठ नहीं कर सकता। यह नियमों का सरासर उल्लंघन है। सीआईटी रोस्टर ने अपने शिकायती पत्र में यह आरोप भी लगाया कि पूरा मामला सीआईटी लाइन के अधीन था, ऐसे में एक अफसर के दबाव में महज उन्हें निलंबित किया गया। कहा कि वह खुद सीआईटी लाइन के अधीन ही काम करते थे। पत्र में यह भी कहा गया कि उनके पास जो साक्ष्य हैं, यदि वह सीबीआई तक पहुंच जाए तो उनकी हत्या भी कराई जा सकती है।
कहा कि जरूरी है कि संबंधित अफसर को उसके पद से हटाकर मेरे खिलाफ जो शिकायत है उसकी जांच किसी राजपत्रिक अधिकारी से करवाई जाए। साथ ही निलंबन भी वापस लिया जाए। दरअसल पिछले दिनों ही पीएमओ और रेलमंत्रालय को एक शिकायतकर्ता द्वारा पत्र भेजकर आरोप लगाया गया था कि जंक्शन पर रोस्टर पर फर्जी हस्ताक्षर के जरिए सौ से अधिक टीटीई घर बैठे वेतन भत्ता लेते रहे हैं। मामले के तूल पकड़ने के बाद सीआईटी रोस्टर को निलंबित कर दिया गया। बाद में सीआईटी रोस्टर और सीआईटी लाइन को चार्जशीट भी दी गई।
डीआरएम कार्यालय में सीआईटी रोस्टर द्वारा कोई शिकायती पत्र दिया गया है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। अगर ऐसा कोई पत्र आया है तो उसकी वैधानिक जांच करवाने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। -डा. अमित मालवीय, सीनियर पीआरओ, एनसीआर।