बारिश के पानी से मेजा के कई गांवों के किसानों की डूबी धान की फसल का सर्वे शुरू हो गया है। सर्वे की जिम्मेदारी एसडीएम मेजा सुरेंद्र प्रताप यादव ने राजस्व कर्मियों को दी है। ऐसे में किसानों में मुआवजे को लेकर उम्मीद जगी है।
15 और 16 जुलाई को हुई भारी बारिश की वजह से मेजा के अमिलिया कला, सोनाई, बरहा, ढेंढ़रा, ढिलिया, चपरतला सहित एक दर्जन गांवों के किसानों की धान की फसल डूब गई थी। पानी निकासी की व्यवस्था न होने से बरहा, सोनाई और अमिलिया कला में 35 दिन बाद भी बारिश का पानी नहीं निकल सका। फसल डूबकर पूरी तरह से नष्ट हो गई है।
शुक्रवार को अमर उजाला में ‘35 दिन बाद भी डूबी है धान की फसल’ शीर्षक से प्रकाशित खबर को लेकर प्रशासन ने गंभीरता दिखाई है। एसडीएम ने बताया कि नष्ट हुई फसल के सर्वे के लिए राजस्व कर्मियों को लगा दिया गया है। मुआवजे की राशि सर्वे के बाद स्पष्ट हो पाएगी। बरहा के लेखपाल धवल पांडेय ने बताया कि बरहा का सर्वे कर लिया गया है। अब चपरतला गांव का किया जाएगा। बरहा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम शंकर पटेल ने कहा कि सर्वे कार्य में प्रशासन लापरवाही न बरते बल्कि किसानों की नष्ट हुई फसल का उचित मुआवजा दे।