केस नंबर 1- मेजा निवासी 60 वर्षीय वृद्धा के गले में दो साल से ट्यूमर था, जो बढ़ रहा था। महिला आयुष्मान लाभार्थी भी थीं। इनकी सर्जरी 15 नवंबर को हुई। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं।
केस नंबर 2- मीरापुर निवासी वृद्ध (65) के गले में कैरोटिड बॉडी ट्यूमर था और इंटरनल कैरोटिड आर्टरी को पूरी तरह से घेर लिया था। 17 नवंबर को इनकी सर्जरी की गई और दस दिनों बाद इन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई।
केस नंबर 3- कौशांबी निवासी 32 वर्षीय महिला को कैरोटिड बॉडी ट्यूमर था। जांच के दौरान पता चला कि इनका ट्यूमर तीसरी स्टेज पर पहुंच गया। ऐसे में सर्जरी करना कठिन था। मगर चिकित्सकों ने मरीज के साथ मिलकर रिस्क लिया। 20 नवंबर को हुई सर्जरी के बाद महिला पूरी तरह से स्वस्थ है।
यह एक कठिन सर्जरी थी, जिसमें तीनों मरीज स्टेज थ्री में पहुंच चुके थे। इस सर्जरी के लिए विशेष प्रकार की योजना बनाई गई। अब मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हैं। - डॉ. राजुल अभिषेक, सीनियर रेजिडेंट, कैंसर विभाग, एसआरएन।
इस प्रकार की गंभीर बीमारियों का इलाज एसआरएन में कुशल चिकित्सकों के द्वारा सफलतापूर्वक हो रहा है। हम आधुनिक तरीकों से इलाज कर रहे हैं। - डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, मोतिलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज