दूसरी ओर, झूंसी की तरफ सूरदास पार्किंग से छतनाग के पास तक गंगा पथ का निर्माण होना है। इसके लिए पत्थर के जाल बिछाए जा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता उदय प्रताप सिंह ने शिकायत में कहा है कि इस तरह के निर्माण में मिर्जापुर के अहरौरा और अदलहाट की खदानों के ही पत्थर स्वीकृत हैं, जबकि सिंचाई विभाग के जेई-ठेकेदार मेजा और शंकरगढ़ की खदानों के घटिया किस्म के कमजोर पत्थर लगा रहे हैं।
यह क्षमता विहीन बलुआ पत्थर पानी में कटान रोकने की बजाय कम समय में ही नष्ट हो सकते हैं। इस बार की बारिश और बाढ़ में परियोजना पूरी होने से पहले ही इसका असर दिखने लगा है। पता चला है कि सिंचाई विभाग के अफसरों ने एस्टीमेट में ही मेजा और शंकरगढ़ की रिजेक्ट खदानों के पत्थर लगाने की स्वीकृति ले रखी है।
मेजा और शंकरगढ़ की खदानों के पत्थर रिवर फ्रंट में लगाने की बात एस्टीमेट में होने की बात कही जा रही है। इन खदानों को रिजेक्ट किए जाने की शिकायत की जांच कराई जा रही है। इसकी पुष्टि होने के बाद कदम उठाया जाएगा। - डीएन शुक्ला, अधिशासी अभियंता, सिंचाई बाढ़ खंड।