डायोसिस ऑफ लखनऊ के बिशप पद की वैधता को लेकर डॉ. पीटर बलदेव और मौजूदा बिशप मॉरिस एडगर दान के बीच विवाद चल रहा है। पीटर बल्देव ने बिशप के पद पर नियुक्ति को लेकर सिविल वाद दाखिल किया था, जिसपर सिविल कोर्ट ने अंतरिम स्थगन आदेश पारित किया था।
प्रयागराज के जिला न्यायालय ने डायोसिस ऑफ लखनऊ के बिशप पद को लेकर डॉ. पीटर बल्देव की ओर से दाखिल स्थायी निषेधाज्ञा अर्जी पर पारित स्थगन आदेश के खिलाफ बिशप मॉरिस एडगर दान की ओर से दाखिल आपत्ति बृहस्पतिवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने पीटर बल्देव की अर्जी पर पारित अंतरिम स्थगन आदेश प्रभावी रखने का आदेश दिया है। यह आदेश अपर सिविल जज मानस वत्स ने दिया है। अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।
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गौरतलब है कि डायोसिस ऑफ लखनऊ के बिशप पद की वैधता को लेकर डॉ. पीटर बलदेव और मौजूदा बिशप मॉरिस एडगर दान के बीच विवाद चल रहा है। पीटर बल्देव ने बिशप के पद पर नियुक्ति को लेकर सिविल वाद दाखिल किया था, जिसपर सिविल कोर्ट ने अंतरिम स्थगन आदेश पारित किया था।
इसी बीच चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ने वर्ष 2013 में बर्खास्त किए गए एडगर दान को बिशप नियुक्त कर पदभार भी सौंप दिया। इस कार्यवाही के खिलाफ पीटर बल्देव ने अवमानना याचिका दाखिल की है। अवमानना याचिका पर एडगर दान के पैरोकार की हैसियत से गोविंद कुमार ने आपत्ति दाखिल कर दलील दी कि बिशप के पक्ष में हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश को छिपाकर स्थगन आदेश हासिल किया गया है।
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प्रतिवाद करते हुए पीटर बलदेव के वकील ने पैरोकार और उसकी ओर से दाखिल आपत्ति को पोषणीयता के आधार पर खारिज करने की दलील दी। कोर्ट ने बिशप दान की ओर से पेश की गई आपत्ति को खारिज करते हुए पीटर बलदेव की अर्जी पर पारित अंतरिम स्थगन आदेश को प्रभावी रखने का आदेश दे दिया।