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सोशल साइट्स पर एक क्लिक से मजा किरकिरा

Sat, 16 Apr 2016 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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आप अपने फेसबुक अकाउंट, ट्विटर या फिर यूट्यूब पर दोस्तों को भेजी गई पोस्ट के साथ दिखने वाले विज्ञापनों पर बस एक बार क्लिक कर दीजिए। फिर देखिए, वैसे ही सैकड़ों अनचाहे विज्ञापन आपके पेज पर बरसने लगेंगे। भले ही आप उसे न देखना चाहें। ऐसे में, आपके पास झुंझलाने के सिवा कोई चारा नहीं बचता है। दरअसल आपको उस पेज पर देखने, शेयर करने का तो अधिकार है लेकिन कब्जा तो सोशल साइट्स चलाने वाली कंपनियों का है। वे जिन चीजों को चाहेंगी, परोसेंगी। आपकी पसंद, नापसंद से उनका कोई मतलब नहीं है। जीमेल, याहू लिंक पर आने वाले विज्ञापनों को रिपोर्ट एज स्पैम में लिंक कराकर राहत पाई जा सकती है लेकिन फेसबुक, यूट्यूब पर तो इसका संकट है।
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सोशल साइट्स पर ऐसे विज्ञापनों को देखकर उपभोक्ताओं के मन में खीझ पैदा होती है। सोशल साइट्स यूजर्स भी इसे लाइक नहीं करते हैं। बावजूद इसके वे इसको झेल रहे हैं। अधिवक्ता जेपी चौरसिया तो इसे मानसिक उत्पीड़न की संज्ञा देते हैं। कहते हैं, सोशल साइट्स पर ऐसी चीजों को ना पसंद के बावजूद देखना पड़ता है। बेवजह चीजों के लिए उनका डाटा कटता और समय भी खर्च होता है। विधि छात्रा दीक्षा द्विवेदी कहती हैं, इसको तो बंद कर देना चाहिए। आखिर इन्हें देखकर चिढ़ लगने लगती है। ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां तो हैं ही, वे उत्पादों की बिक्री के लिए इतना प्रचार-प्रसार कर ही रहीं हैं। बावजूद इसके सोशल साइट पर भी वही देखकर झुंझलाहट होती है। इस पर कुछ तो बैन होना ही चाहिए।

आईटी एक्सपर्ट्स कहते हैं, इस पर बैन नहीं लगाया जा सकता है। आखिरकार सोशल साइट्स की सुविधा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों की कमाई का जरिया यही है। जितना विज्ञापन, उतना पैसा। जैसे-जैसे इस पर यूजर्स बढ़ेंगे विज्ञापन भी बढ़ेगा, कमाई भी बढ़ेगी। मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी के कंप्यूटर साइंस विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर मयंक पांडेय कहते हैं, फेसबुक पेज की साइट पर नजर आने वाले विज्ञापनों को रोका नहीं जा सकता है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय की मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर दीपा पुनेठा कहती हैं, सोशल साइट्स पर बार-बार विज्ञापनों को देखकर लोगों में एक तरह की मनोवृत्ति भी बनती है। कंपनियां उपभोक्ताओं की जरूरत और मनोवृत्ति दोनों को ध्यान में रखकर फायदा उठाती हैं। ऐसे में लोगों को अपनी जरूरत का ध्यान रखकर सोशल साइट्स का इस्तेमाल करना चाहिए। आजकल सोशल साइट्स यूजर्स भी जागरूक हैं, वह बाजार से इसकी तुलना करके ही खरीदारी करते हैं।
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