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स्थापना दिवस पर विशेष : इलाहाबाद विवि को मिले शिक्षक,लेकिन अब भी पुरानी पहचान की दरकार

Sat, 23 Sep 2023 05:19 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

विश्वविद्यालय में एक समय शिक्षकों के 500 से अधिक पद खाली थे। विवि में गिरावट के पीछे इसे मुख्य वजह माना जाता रहा है। कई बार इन पदों के लिए भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन गतिरोध के बाद बीच में रोकनी पड़ जाती थी।
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Prayagraj News : इलाहाबाद विश्वविद्यालय। विजयनगरम हॉल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्थापना के शनिवार को 136 वर्ष पूरे जाएंगे। लंबे गतिरोध के बाद शिक्षकों व कर्मचारियों की नियुक्तियों का सिलसिला शुरू हो गया है। इसी के साथ विश्वविद्यालय में शैक्षणिक माहौल व अनुसंधान को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं, लेकिन एक दौर में दुनिया के शीर्ष संस्थानाें में शुमार रहे विश्वविद्यालय को पुरानी पहचान पाने के लिए अभी लंबा सफर तय करना होगा।

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विश्वविद्यालय में एक समय शिक्षकों के 500 से अधिक पद खाली थे। विवि में गिरावट के पीछे इसे मुख्य वजह माना जाता रहा है। कई बार इन पदों के लिए भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन गतिरोध के बाद बीच में रोकनी पड़ जाती थी। हालांकि,यह गतिरोध दूर होता दिख रहा है और शिक्षकों के साथ कर्मचारियों की भी भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अब तक 28 विभागों में 300 शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। इनके अलावा 376 अफसरों एवं कर्मचारियों की भी नियुक्ति हुई है।

उम्मीद जताई जा रही है कि ऐसे ही यह प्रक्रिया जारी रही तो एक साल में ज्यादातर रिक्त पदों पर शिक्षकों व अन्य कर्मचारी की नियुक्ति हो जाएगी। हालांकि, प्रोबेशन पीरियड के दौरान ही दो शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने का फैसला भी विश्वविद्यालय प्रशासन को लेना पड़ा है। इसके बावजूद नई नियुक्तियों से उम्मीद जगी है कि विश्वविद्यालय एक बार फिर अपनी पुरानी पहचान पाने की तरफ अग्रसर होगा।
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सत्र नियमित करने, स्नातक कक्षाओं में सेमेस्टर सिस्टम है पहली चुनौती

विवि प्रशासन के सामने सबसे पहली चुनौती सत्र नियमित करने को लेकर है। विश्वविद्यालय अपने नियमित सत्र के लिए जाना जाता रहा, लेकिन कोरोना काल के बाद से इसे लेकर संकट खड़ा गया है। इसके अलावा सीईयूटी के माध्यम से स्नातक प्रथम वर्ष में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने के बाद स्थिति और बिगड़ी है।

इसका अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि अभी विश्वविद्यालय की स्नातक कक्षाओं में प्रवेश हो रहे हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय एवं संघटक कॉलेजों की परास्नातक कक्षाओं में सेमेस्टर सिस्टम लागू हो गया है, लेकिन स्नातक कक्षाओं में इसे अभी लागू किया जाना है। इसी वर्ष शुरू हुए पांच नए पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर सिस्टम लागू हो गया है। अन्य में भी एक-दो साल में सेमेस्टर सिस्टम लागू करने की योजना है।

एक वर्ष में विद्यार्थियों को मिलीं ये सुविधाएं

-रसायन विज्ञान विभाग का नया भवन
-लेक्चर थिएटर कॉम्प्लेक्स

-1500 लोगों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम
-ओपेन एयर ऑडिटोरियम एवं आर्ट गैलेरी कॉम्पलेक्स

-खेलों का विकास
-अंतरराष्ट्रीय स्तर का एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान

-पुस्तकालय भवन का विस्तार
-लैंग्वेज लैब

-10 नए इंटीग्रेटेड कोर्सेज की शुरुआत

विश्वविद्यालय के 137वें स्थापना दिवस पर मेरी सभी शिक्षकोें, छात्र-छात्राओं व संस्थान से जुड़े समाज के सभी वर्गों को शुभकामनाएं। विश्वविद्यालय एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। समाज में ज्ञान और विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए अपने दायित्व और राष्ट्र निर्माण में सहभागिता के लिए हमेशा ही प्रतिबद्ध रहा है। अब मेरा प्रयास है कि इस दायित्व के निर्वहन में आ रही किसी भी बााधाओं को दूर किया जाए। इसके लिए मेरी कोशिश है कि हमारे पुराछात्र जो हमारा गौरव हैं पुन: अपनी मातृसंस्था से जुड़ें और इसके नवनिर्माण के भागीदार बनें। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की कहानियां फिर से सुनाई देंगी और यह देश के सर्वेष्ठ शिक्षा संस्थानों में गिना जाएगा। - प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव, कुलपति

मात्र एक कमरे में 13 छात्रों संग शुरुआत करने वाले विवि ने गढ़े कई कीर्तिमान

देश को कई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, कानूनविद् और न जाने कितने दिग्गज देने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने अपने 136 वर्षों के सफर में कई कीर्तिमान गढ़े। किसे मालूम था कि किराये के एक भवन में 13 छात्रों के साथ म्योर कॉलेज ने जो सफर शुरू किया था, आगे चलकर वह देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों में शुमार होगा। वर्तमान में यहां तकरीबन 25 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।

इविवि की स्थापना 23 सितंबर 1887 को हुई थी। इससे पहले का एक दौर वह भी था, जब उत्तर भारत में शिक्षा का कोई केंद्र नहीं था। 24 मई 1867 को संयुक्त प्रांत के तत्कालीन गवर्नर विलियम म्योर ने प्रयागराज में एक स्वतंत्र महाविद्यालय और एक विश्वविद्यालय खोलने की इच्छा जताई। दो साल बाद 1869 में योजना तैयार की गई। इस काम के लिए कमेटी बनाई गई, जिसके अवैतनिक सचिव प्यारे मोहन बनर्जी बनाए गए। नागरिकों ने महाविद्यालय के लिए 16 हजार रुपये जुटाने का संकल्प लिया। पब्लिक एजूकेशन के निदेशक कैंपसन ने प्रस्तावित विश्वविद्यालय का प्रारूप तैयार किया।

चंद्रशेखर आजाद पार्क (तत्कालीन नाम अल्फ्रेड पार्क) के पास जमीन को चिह्नित किया गया। स्थान तय होने के बाद कमेटी बनाई गई, जिसे महाविद्यालय के लिए इमारतें बनवाने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और प्रस्तावित महाविद्यालय की इमारत का निर्माण पूरा होने तक किसी भवन को किराये पर लेकर महाविद्यालय का संचालन शुरू कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेफ्टीनेंट गवर्नर सर विलियम म्योर ने इन प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया। उन्होंने दो हजार रुपये दान में भी दिए। कमेटी ने दरभंगा कैसल के मालिक से जमीन को लीज पर लेने की बात की, ताकि कक्षाओं का संचालन जल्द शुरू किया जा सके। बाद में एक इमारत को तीन साल के लिए लीज पर लिया गया।

1889 में हुई थी पहली प्रवेश परीक्षा

शुरुआती दिनों में दरभंगा कैसल में कक्षाएं संचालित होती थीं। पहले साल केवल 13 दाखिले हुए थे। म्योर कॉलेज की इमारत 1886 में बनकर तैयार हुई, तब तक छात्रों की संख्या 129 हो गई थी। विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए पहली बार मार्च 1889 में प्रवेश परीक्षा हुई थी। शुरुआती दौर में यहां से पंडित मदन मोहन मालवीय, पुरुषोत्तम दास टंडन, मोतीलाल नेहरू, मुंशी राम प्रसाद, मुंशी अशर्फी लाल और कैलाश नाथ काटजू ने शिक्षा ग्रहण की।

क्वांटम मैकेनिक्स के पुरोधा ने स्वीकारी थी प्रोफेसरशिप

क्वांटम मौकेनिक्स के पिता कहलाने वाले इरविन श्रॉडिंजर को इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रोफेसरशिप स्वीकार करने का प्रस्ताव भेजा गया था। उन्होंने प्रोफेसरशिप स्वीकार कर ली थी, लेकिन उसी दौरान द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हो गया और इरविन विश्वविद्यालय में ज्वाइन नहीं कर सके।
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नोबेल के लिए प्रस्तावित हुए कई नाम

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो.मेघनाथ साहा का नाम नोबेल पुरस्कार के लिए पांच बार प्रस्तावित किया गया। प्रो.केएस कृष्णन, प्रो.नील रतन धर, प्रो.के. बनर्जी का नाम भी नोबेल पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया गया था।
विश्वविद्यालय ने देश को दिए गई दिग्गज

पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर एवं वीपी सिंह विश्वविद्यालय के छात्र रहे। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना, कोठारी आयोग के चेयरमैन रहे एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रो.डीएस कोठारी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुभाष कश्यप, पूर्व सीएजी टीएन चतुर्वेदी और ढेर सारे बड़े नामों की इविवि के पुरा छात्रों में गिनती होती है।

स्थानपना को लेकर मुख्य बिंदु

16 हजार रुपये जुटाने का लिया गया था संकल्प
02 हजार रुपये सर विलियम म्योर ने किए थे दान
03 साल के लिए दरभंगा कैसल के मालिक से लीज पर ली गई थी इमारत
22 जनवरी 1872 को महाविद्यालय खोले जाने का ज्ञापन भारत सरकार के पास भेजा
01 जुलाई 1872 से म्योर सेंट्रल कॉलेज ने अपना काम शुरू किया
13 लोगों ने पहले सत्र में लिया था दाखिला
23 सितंबर 1887 को हुई इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना
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