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UP: 'अब तो नहीं देने पड़ेंगे रुपये', बाप का कत्ल कर बेटे ने वकील को फोन कर पूछी ये बात; इस फैसले से था नाराज

Sun, 14 Jun 2026 12:14 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रयागराज में भरण-पोषण के फैसले से नाराज बेटे ने पिता को गोली मार दी। विवि पुलिस चौकी से 50 मीटर दूर दोस्त के साथ मिलकर आरोपी ने सरेआम पिता की हत्या कर दी। पुलिस छानबीन में पता चला है कि घटना के बाद एक बेटे ने उस अधिवक्ता से संपर्क किया, जो भरण-पोषण के मुकदमे की पैरवी कर रहे थे। बातचीत के दौरान कथित तौर पर पूछा गया कि अब तो पैसे नहीं देने पड़ेंगे।
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prayagraj murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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प्रयागराज के कर्नलगंज के विश्वविद्यालय पुलिस चौकी से 50 मीटर की दूरी पर शनिवार सुबह सरेआम रामदुलारे कोरी (70) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। सीने में तमंचा सटाकर गोली मार रहे सबसे छोटे बेटे अखिलेश उर्फ शिवा उर्फ शीबू की हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। पिता को भरण-पोषण का खर्च देने से बचने के लिए हत्या की वजह सामने आई है।
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आरोपी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। रामदुलारे की पत्नी कलावती, चार बेटे और एक बेटी के फरार होने से पुलिस का इन सभी पर शक गहरा गया है। बेटे जितेंद्र की शिकायत पर कर्नलगंज पुलिस ने अखिलेश और एक अन्य पर एफआईआर दर्ज की है।

शिवकुटी के लाला की सराय निवासी रामदुलारे करीब ढाई साल से नैनी स्थित वृद्धाश्रम में रहते थे। घर में उनकी पत्नी कलावती छह बेटे राजकुमार, जितेंद्र, शैलेंद्र, सुरेंद्र, वीरेंद्र, अखिलेश और एक बेटी ललिता रहती हैं। बड़ी बेटी नीलम की शादी हो चुकी है।
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शुक्रवार शाम रामदुलारे घर आए थे। शनिवार सुबह करीब 6:15 बजे वह बेटे जितेंद्र को कहकर निकले कि शाम को आऊंगा। सुबह सात बजे विवि पुलिस चौकी से चंद मीटर दूर लल्ला चुंगी चौराहे पर उन्हें गोली मार दी गई।

हैरानी की बात है कि गोली चलने की आवाज किसी को सुनाई नहीं दी। जैसे ही वह बीच सड़क पर गिरे तो आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। एसआरएन अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि रामदुलारे को गोली मारी गई है। एक गोली सीने में फंसी है। पुलिस ने आधार कार्ड से पहचान की।

छड़ी के सहारे पैदल जा रहे थे
वारदात घटनास्थल पर लगे कैमरे में कैद हुई है। 25 सेकंड के वीडियो में रामदुलारे छड़ी के सहारे पैदल लल्ला चुंगी चौराहे की तरफ आ रहे हैं। इसी बीच बाइक सवार दो युवक आए। एक ने सफेद तो दूसरे ने लाल रंग की शर्ट पहनी थी। इनमें से मुंह पर गमछा बांधे पीछे बैठा युवक बाइक से उतरकर रामदुलारे के पास गया और सीने में तमंचा सटाकर गोली मार दी। घटना के बाद दोनों तेलियरगंज की ओर भाग गए। गोली मारने वाले की पहचान अखिलेश के रूप में है।

हत्या के बाद एक बेटे ने वकील को फोन कर पूछा
पुलिस छानबीन में पता चला है कि घटना के बाद एक बेटे ने उस अधिवक्ता से संपर्क किया, जो भरण-पोषण के मुकदमे की पैरवी कर रहे थे। बातचीत के दौरान कथित तौर पर पूछा गया कि अब तो पैसे नहीं देने पड़ेंगे। पुलिस का कहना है कि यह फोन कॉल मामले की अहम कड़ी साबित हो सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बातचीत किस परिस्थिति में हुई और उसका हत्या से कोई संबंध है या नहीं। कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

 

मकान रामदुलारे के नाम पर, संपत्ति जांच के घेरे में
पुलिस जांच में यह तथ्य भी आया है कि लाला की सराय में रामदुलारे का मकान उनके नाम पर ही दर्ज है। इससे बाद संपत्ति विवाद की आशंका भी गहराने लगी है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या के पीछे केवल भरण-पोषण विवाद था या इसके पीछे संपत्ति को लेकर कोई बड़ी साजिश भी शामिल है।

एक ही मकान में रहते थे सभी बेटे, जितेंद्र से ही बेहतर संबंध
बुजुर्ग के सभी छह बेटे उनके मकान में अलग-अलग कमरों में रहते थे। मामला न्यायालय में होने के कारण बेटों की बेदखली को लेकर भी चर्चा थी जिससे परिवार में तनाव और बढ़ गया था। रामदुलारे का केवल एक बेटे जितेंद्र से ही बेहतर संबंध थे। वह वृद्धाश्रम से घर आते थे, तो अधिकतर समय जितेंद्र के कमरे में ही रुकते थे। पुलिस बेदखली के पहलू पर भी जांच कर रही है। वहीं सरेआम हत्या के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

बेटा बोला-पिता को दिए थे 13 हजार रुपये, पुलिस को नहीं मिली रकम
पुलिस को दिए बयान में बेटे जितेंद्र ने दावा किया है कि कोर्ट के फैसले के बाद पिता को 13 हजार रुपये एडवांस के तौर पर दिए थे। वहीं पुलिस को घटनास्थल और मृतक के सामान की जांच में नकदी नहीं मिली। रकम दिए जाने की कहानी में कोई और तथ्य तो नहीं छिपा। पुलिस से इस पहलू से भी छानबीन कर रही है। जितेंद्र ने बताया कि जिला न्यायालय की ओर से भरण-पोषण संबंधी आदेश सुनाए जाने के बाद शुक्रवार शाम करीब पांच बजे रामदुलारे घर पहुंचे थे। 
 

अदालत ने छह बेटों को पिता के लिए 40-40 हजार (2.40 लाख) रुपये देने का आदेश दिया था। इसी के तहत उसने 13 हजार रुपये अग्रिम रूप से पिता को दिए थे। जितेंद्र का कहना है कि पिता ने रुपये अपने बैग में रख लिए थे। घर से निकलते समय उन्होंने कहा था कि वह शाम तक वापस आएंगे। यदि देर हुई तो वृद्धाश्रम चले जाएंगे। सुबह सूचना मिली कि उनका एक्सीडेंट हो गया है। अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि गोली लगने से उनकी मौत हुई है। 

पत्नी, चार बेटे व बेटी फरार, सभी के मोबाइल बंद
पुलिस रामदुलारे के घर पहुंची तो पत्नी कलावती, बेटा राजकुमार, सुरेंद्र, वीरेंद्र, अखिलेश और एक बेटी ललिता नहीं थी। घर में सिर्फ जितेंद्र मिला। पूछताछ में पता चला कि वारदात के बाद से सभी फरार हैं। सभी के मोबाइल फोन भी बंद हैं। पुलिस को आशंका है कि हत्त्या में अखिलेश के अलावा अन्य की भूमिका हो सकती है। शैलेंद्र और जितेंद्र से पूछताछ की जा रही है।

तीन टीमें आरोपियों की तलाश में जुटीं 
पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ कर साजिश और अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाने का प्रयास कर रही है। वहीं, आरोपी अखिलेश के साथी की भी पुलिस ने पहचान कर ली है।

 

एक बार फिर बेटे ने पिता का किया कत्ल
हाल ही में साउथ मलाका में अभिषेक वैश्य ने पिता कारोबारी वीरेंद्र कुमार वैश्य, मां अनीता वैश्य और बहन की हत्या कर रिश्तों को शर्मसार कर दिया था। अब लल्ला चुंगी चौराहे पर रामदुलारे कोरी की हत्या होने के बाद जब बेटे का नाम सामने आया तो लोगों के लिए इस पर यकीन करना मुश्किल हो गया कि एक बार फिर बेटे ने पिता का कत्ल कर दिया।
 

इस हत्याकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पारिवारिक रिश्तों में इतनी कड़वाहट कैसे पैदा हो रही है कि अपने ही अपनों की जान लेने पर उतारू हो जा रहे हैं। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था। बढ़ती पारिवारिक कलह के कारण रामदुलारे मानसिक रूप से परेशान थे। आए दिन घर में झगड़े की आवाजें सुनाई देती थीं। रामदुलारे कोरी और उनके बेटों के बीच संबंध काफी समय से खराब थे।

 

कई बार स्थिति इतनी बिगड़ जाती थी कि लोगों को बीच-बचाव करना पड़ता था। बेटों के वैवाहिक जीवन में भी समस्याएं थीं। बताया जाता है कि परिवार के दो बेटों की पत्नियां भी उन्हें छोड़कर चली गई थीं।

थाने में हुई थी पंचायत
लोगों ने बताया कि 40-40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की बात पर शिवकुटी थाने में पारिवारिक विवाद को लेकर पंचायत हुई। थाने में पक्षकारों के बीच बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की गई थी। 

 

कोर्ट ने हर माह 800-800 रुपये देने का सुनाया था फैसला
जितेंद्र ने बताया कि पत्नी और बेटों के साथ विवाद के कारण पिता वृद्धाश्रम में रहते थे। तीन दिन पहले ही जिला न्यायालय ने पिता के भरण-पोषण के लिए सभी से 40-40 हजार रुपये आर्थिक सहायता व हर माह 800-800 रुपये देने का फैसला सुनाया था। पुलिस को आशंका है कि इस फैसले से परिवार के कुछ सदस्य नाराज थे और इसी के बाद हत्या की साजिश रची गई।

 
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अदालत प्रारंभिक जांच में पता चला है कि अखिलेश ने ही पिता की गोली मारकर हत्या की है। जिला न्यायालय में भरण-पोषण का वाद चल रहा था। के फैसले से नाराज होकर हत्या करने का शक है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। विमल किशोर मिश्रा, एसीपी, कर्नलगंज
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