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छात्रसंघ के मुद्दे पर सोशल मीडिया में घमासान

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allahabad university - फोटो : प्रयागराज
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के छात्र अभिषेक गर्ग ने फेसबुक पर टिप्पणी की है कि छात्रसंघ का वर्तमान स्वरूप वीभत्स है। कुछ समय के लिए तो बंद कर देना चाहिए। वहीं, आयुष सिंह ने कहा है कि छात्रसंघ जिंदाबाद था और रहेगा। छात्रसंघ की जगह छात्र परिषद के गठन की तैयारी की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर छात्रसंघ के मुद्दे पर जंग छिड़ गई है। इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय के छात्र बंटे नजर आ रहे हैं। कोई छात्रसंघ तो कोई छात्र परिषद के पक्ष में है। 
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छात्रसंघ की जगह छात्र परिषद को आना चाहिए या नहीं, इस पर फेसबुक पर हजारों कमेंट किए गए हैं। इविवि के छात्र अभिषेक मिश्र ने इसे विश्वविद्यालय प्रशासन का सही कदम बताया है तो छात्र अमर वर्मा ने लिखा है कि विश्वविद्यालय लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का पालन कराए न कि छात्रसंघ पर प्रतिबंध लगाए। छात्र अनूप सिंह राजपूत का मत है कि छात्रसंघ के वर्तमान स्वरूप को देखते हुए कुछ समय के लिए तो बंद कर ही देना चाहिए। हालांकि छात्रसंघ पर प्रतिबंध कोई ठोस कार्रवाई नहीं है लेकिन, कुछ तो करना ही होगा। इससे पढ़ाई का माहौल बनेगा।

छात्र विमलेश पांडेय की टिप्पणी है कि कुछ सुधार करें, बंद करना समाधान नहीं है। छात्र ऋषभ श्रीवास्तव ने लिखा है कि अपराधी तो बहुत से सांसद और विधायक भी हैं तो क्या लोकसभा और विधानसभा का चुनाव भी बंद होना चाहिए। छात्रसंघ चुनाव बंद करना समस्या का हल नहीं है। सीएमपी के छात्र सत्या ने फेसबुक पर लिखा है कि इविवि प्रशासन की गलत कार्य शैली पर कोई सवाल उठाने वाला है तो वह छात्रसंघ ही है। प्रवीण कुमार शुक्ला ने लिखा है कि छात्रसंघ जब से दोबारा बहाल हुआ है, इसने अपने उद्देश्य की पूर्ति तो नहीं की है बल्कि इसकी वजह से मारपीट, गुंडागर्दी और छात्रों की पढ़ाई का नुकसान हुआ है लेकिन इसको बंद कर देना समाधान नहीं है। इसके लिए नई गाइड लाइन बनानी होगी, जो इसके उद्देश्य पूर्ति में सहायक हो। छात्र नीरज सिंह, संतोष शुक्ला, विक्की शुक्ला ने लिखा है कि बिल्कुल बंद होना चाहिए, ठीक हुआ।
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फेसबुक पर कुछ अन्य टिप्पणियां 
‘बंद होना उचित नहीं है लेकिन यदि छात्रों को पार्टी पैनल से टिकट न दिया जाए। अराजकता फैलाने वाले छात्रों और जिन छात्रों पर मुकदमे हों वे चुनाव लड़ पाएं तो तब कुछ सुधार हो पाएगा अन्यथा बंद हो जाना ही बेहतर होगा।’ अभिषेक त्रिपाठी
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‘वैसे तो छात्रसंघ बहुत जरूरी है, पर यहां तो गैंगवार चल रहा है और मौजूदा परिदृश्य विनाशकारी हो गया है।’ स्कंद नारायण तिवारी

‘विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी नाकामी का ठीकरा छात्रसंघ पर फोड़ रहा है और छात्रसंघ भी दिशा विहीन हो गया है।’ संदीप सिंह पटेल

‘बहुत सराहनीय कदम, शिक्षण संस्थान को राजनीति का आखाड़ा बना दिया गया था।’ राकेश चौहान
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