इसके बाद उनके आधार कार्ड में जालसाजी कर पता बदलवा अलग-अलग बैंकों में उनके खाते खुलवाता था। विकास झारखंड में बैठे अपने साथियों से साइबर फ्रॉड के जरिये रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर कराता था। फिर खातों से एटीएम के जरिये नकदी निकालकर झारखंड में अपने गिरोह के लोगों तक पहुंचा देता था।
अभियुक्तों के खातों की जांच में पता चला है कि इन्होंने कई राज्यों के लोगों को साइबर फ्रॉड का शिकार बनाकर रकम अपने खातों में डलवाई है। इनमें से अधिकांश लोगों ने शिकायत भी दर्ज कराई है। पीड़ितों में वाराणसी के सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव भी शामिल हैं। उनके खाते से 10.29 लाख रुपये उड़ाए गए। जिसके संबंध में मडुवाडीह थाने में केस दर्ज है।
ऐसे पकड़ में आए
कर्नलगंज में विवि चौराहे के पास जनसेवा केंद्र चलाने वाले रंजीत कुमार गौड़ ने तीन दिन पहले थाने में शिकायत की। बताया कि 21 अक्तूबर की शाम छह बजे विकास दास व राकेश कुमार मंडल अपने दो साथियों संग आए। उन्होंने आधार से पैसे निकालने को कहा, जो तकनीकी कारणों से नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने उसके तीन खातों में पांच हजार फोन पे व 44 हजार इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से भेजे। जिसके बाद उसने एटीएम से निकालकर चारों को नकद दे दिए। 22 अक्तूबर को एक अन्य ग्राहक का पेमेंट करने पर पता चला कि उसने अपने जिन तीन खातों में रुपये ट्रांसफर कराए थे, उन्हें साइबर क्राइम सेल की तरफ से होल्ड पर रखवा दिया गया है। बैंक में पता चला कि उक्त रकम साइबर फ्रॉड के जरिये भेजी गई थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विकास को पकड़कर सख्ती से पूछताछ की तो उसने सच्चाई बयां कर दी।
यह हुए गिरफ्तार
विकास दास, राकेश कुमार मंडल, मनीष कुमार मंडल, संतोष कुमार राय, गोविंद मंडल व करण कुमार मंडल उपरोक्त सभी निवासी गिरिडीह झारखंड। इसके अलावा गिरिडीह के ही सीताराम मंडल, मांटू मंडल व पवन मंडल वांछित हैं। खातों से रकम उड़ाने का काम यही तीनों करते थे।
बरामदगी
33400 नकद, एक टैब, छह मोबाइल, 25 पासबुक, 14 चेकबुक,, 30 एटीएम कार्ड, 17 आधार , सात पैन कार्ड, दो बैंक खाता किट, 13 सिम कार्ड