दालों की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम आदमी के किचन का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। अरहर, चना, उड़द, मूंग, मटर की दालों में पिछले 15 दिन में एक से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी आई है। इसका सीधा असर फुटकर बाजार पर है, जहां दालों की कीमतों में प्रतिकिलो 10 से 20 रुपये तक की तेजी आई है। यही हाल चीनी का है। वहीं पखवारे भर पहले तक 35-36 रुपये प्रतिकिलो बिक रही चीनी छलांग मारते हुए प्रतिकिलो 40 रुपये के पार पहुंच गई है। मौसम की बेरुखी और फसल कम होने के कारण इन खाद्य पदार्थों की कीमतों में अभी और तेजी की संभावना जताई जा रही है।
कहीं सूखा तो कहीं बेमौसम बारिश का सीधा असर फसलों पर पड़ा है। कई राज्यों में सूखे के कारण फसल नहीं उग सकी या फिर उम्मीद से कम काफी कम पैदावार हुई। मौसम की मार इससे सबसे ज्यादा दालों पर ही पड़ी है। नतीजा यह हुआ कि बाजारों में इनकी कीमतें फिर रफ्तार पकड़ने लगी हैं। आमतौर पर घरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल अरहर दाल का होता है। उसके बाद चना दाल फिर मटर और उड़द, मूंग आदि दालें लोग इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनकी बढ़ती कीमतें लोगों पर भारी पड़ने लगी है।
हालत यह है कि पखवारे भर पहले तक अरहर की जो दाल 12000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रही थी, उसकी कीमत में दो हजार का उछाल आ गया है और प्रति क्विंटल 14000 रुपये के स्तर तक पहुंच गई है। कमोबेश यही स्थिति चीनी की है, जो तकरीबन हर घर में इस्तेमाल होती है। इसकी बढ़ती कीमत ने चाय से लेकर मिठाई तक का स्वाद बिगाड़ना शुरू कर दिया है। चीनी के साथ पूरे उत्तर भारत में दालों में सबसे ज्यादा अरहर की ही खपत होती है, लेकिन इनकी मांग ज्यादा और उपलब्धता कम होने का असर कीमत पर पड़ रहा है।
दो सौ के पार पहुंचने पर आएगी आयात की याद
अरहर दाल की कीमत एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगी है, लेकिन इसे लेकर केंद्र सरकार अब तक गंभीर नहीं है। मौसम की वजह से पैदावार कम हुई, सरकार इससे भलीभांति वाकिफ है, लेकिन इसके लिए दाल के आयात और पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता को लेकर गंभीर नहीं है। सरकार शायद तब जागेगी, जब अरहर दाल की कीमत 200 प्रतिकिलो या उसके पार पहुंच जाएगी। गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश चंद्र केसरवानी का कहना है कि दाल की फसल तीन वर्ष से प्रभावित है। सरकार ने इस बार गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ा दिया, जिसका असर चीनी के भाव पर दिख रहा है। कहा कि अरहर दाल के आयात के लिए सरकार को अभी से कदम उठाने चाहिए, क्योंकि समय रहते पर्याप्त मात्रा में दाल उपलब्ध हो जाएगी तो कीमत पर नियंत्रण लगेगा, वर्ना एक बार फिर अरहर आम लोगों की पहुंच से बाहर होगी।
थोक मंडी (कीमत प्रति क्विंटल में)
वर्तमान 15 दिन पहले
दाल अरहर 14000 12000
दाल चना 7000 6000
दाल उड़द 13000 11000
दाल मटर 4000 3500
चीनी 3700 3600
खुदरा बाजार (कीमत प्रतिकिलो में)
वर्तमान 15 दिन पहले
दाल अरहर 150-160 130-140
दाल चना 80 70
दाल उड़द छिलका 160 130
दाल उड़द धुली 190 170
चीनी 40-42 35-36