सिद्धार्थ शुक्ला
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घर-घर में हो गए थे चाहने वाले, निधन से सभी हैं दुखी
साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले बाबा अभय अवस्थी बताते हैं कि सिद्धार्थ के पिता कुछ साल प्रयागराज में रहे हैं। प्रयागराज के अलावा कानपुर में भी उनका परिवार रहा है। वरिष्ठ रंगकर्मी प्रवीण शेखर कहते हैं कि सिद्धार्थ का असमय निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, वो युवा रंगकर्मियों के रोल माडल थे। बताते हैं कि उनका प्रयागराज तो कम आना हुआ लेकिन यहां से कोई मुंबई जाता था तो उससे पूरी आत्मीयता से मिलते थे। निर्देशक सुदीपा मित्रा कहती हैं कि बिग बास, बालिका वधु सहित तमाम धारावाहिकों में सिद्धार्थ का काम लोगों के दिल को छूने वाला था, घर-घर में उनके चाहने वाले हो गए थे, उनका असमय जाना बहुत कष्टकारी है।