दिग्गज फिल्मकार श्याम बेनेगल का संगमनगरी से गहरा नाता रहा है। विख्यात साहित्यकार धर्मवीर भारती के उपन्यास सूरज का सातवां घोड़ा पर फिल्म बनाकर तो वह इस मिट्टी से जुड़े ही थे, प्रयाग संगीत समिति में टिकट लेकर नाटक देखने का भी उनका संस्मरण लोगों को याद है।
कुंभ का फलक उनके लिए बहुत बड़ा था। वह कुंभ पर फिल्म भी बनाना चाहते थे, लेकिन शायद नियति को यह मंजूर नहीं था। इलाहाबाद विश्व विद्यालय में फिल्म स्टडी सेंटर के कन्विनर रहे प्रो. महेश चंद्र चट्टोपाध्याय से उनकी कई स्मृतियां जुड़ी हैं।
निधन की खबर मिलने के बाद चट्टोपाध्याय ने बेनेगल से अपने पुराने रिश्तों को याद किया। बताया कि डिस्कवरी ऑफ इंडिया की शूटिंग के लिए बेनेगल प्रयागराज आए थे। फिल्म सोसाइटी के 25 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने एक पत्र भी चट्टोपाध्याय को लिखा था, जो अब भी उनके पास सुरक्षित है।
प्रो. चट्टोपाध्याय बताते हैं कि डिस्कवरी ऑफ इंडिया की शूटिंग के दौरान उनसे जब पूछा गया कि बच्चों के लिए फिल्में क्यों नहीं बनाई जातीं। तब उनका जवाब था कि शोले है तो। उनका कहना था कि जिसे बच्चे देखें, वही तो बच्चों की फिल्म होगी।
धर्मवीर भारती के उपन्यास सूरज का सातवां घोड़ा पर फिल्म बनाने वाले बेनेगल महाकुंभ पर भी फिल्म बनाने की सोचते रहे। एक सेमिनार में मुलाकात के दौरान इस बात को उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मीडिया स्टडी सेंटर के कोर्स कोआर्डिनेटर प्रो. धनंजय चोपड़ा से साझा किया था।
प्रो. चोपड़ा बताते हैं कि वह प्रयागराज की मिट्टी से बहुत गहरा लगाव रखते थे। ओबरा पावर प्लांट पर भी उन्होंने डाक्यूमेंट्री बनाई थी। तब बेनेगल ने उनसे कुंभ की विस्तार से चर्चा की थी। बेनेगल कुंभ पर फिल्म बनाने के लिए लंबे समय तक सोचते रहे, लेकिन उनकी यह आस अधूरी ही रह गई।
प्रो. चोपड़ा बताते हैं कि इलाहाबाद नाट्य संघ की ओर से एक बार प्रयाग संगीत समिति में नाट्य समारोह आयोजित किया गया था, तब बेनेगल उस समारोह में नाटक देखने के लिए टिकट लेकर पहुंचे थे।