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पहले दिन ही विवादों में शटल बस सेवा, कम मानदेय के आरोप में संविदा कर्मियों ने नहीं चलाई बसें

Tue, 01 Jan 2019 06:33 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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प्रदर्शन करते संविदा कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
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कुंभ के मद्देनजर नए वर्ष के मौके पर शुरू की गई रोडवेज की शटल सेवा पहले दिन ही विवादों के घेरे में आ गई। इस सेवा के लिए लखनऊ  से आए संविदाकर्मियों ने कम मानदेय दिए जाने का आरोप लगाते हुए सिविल लाइंस बस स्टेशन से शटल बसें निकालने से इंकार कर दिया। बस स्टेशन  परिसर में ही संविदा चालकों एवं परिचालकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। तकरीबन दो घंटे तक संविदाकर्मियों ने बसें नहीं निकलनी दीं। बाद में अफसरों ने कर्मचारियों से वार्ता कर उन्हें आश्वस्त किया कि जो मानदेय उन्हें मिलता आया है, वही उन्हें मिलेगा।

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दरअसल, कुंभ के मद्देनजर प्रयागराज में लोगों की सुविधा के लिए रोडवेज द्वारा शटल सेवा की शुरुआत मंगलवार से हुई। इन बसों के लिए लखनऊ, वाराणसी, कानपुर आदि परिक्षेत्र के संविदा चालकों एवं परिचालकों को प्रयागराज बुलाया गया है। शहर के दस रूटों पर कुल 217 बसों का संचालन किया जाना है।
 

मंगलवार की सुबह तमाम रूटों के लिए वर्कशॉप और सिविल लाइंस बस स्टेशन से बसें निकली भीं, लेकिन लखनऊ से आए 86 संविदा  परिचालक एवं इतनी ही संख्या में आए चालकों ने बस चलाने से इंकार कर दिया। संविदा कर्मी अजय त्रिपाठी, संदीप शुक्ला, सुखदेव सिंह, रंजीत सिंह आदि ने बताया कि माह भर में 22 दिवसों में पांच हजार किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। इसकी एवज में रोडवेज उन्हें भुगतान करता है। बहुत से  कर्मचारियों को प्रतिकिमी के हिसाब से भुगतान होता है। लखनऊ की बात करें तो वहां नियमित रूप से 350 किमी के आसपास दूरी तय करते हैं। एक किमी का 1.36 रुपये का भुगतान होता है। 

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वहीं  प्रयागराज में शटल बस सेवा के रूप में उन्हें दिनभर में 75 किमी चलना होगा। ऐसे मेें भुगतान की राशि उनकी काफी कम हो जाएगी। कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें लखनऊ की तर्ज पर भुगतान हो। इन मांगों को लेकर कर्मचारियों ने वहां शोरशराबा भी किया। इस बीच क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. हरिशचंद्र यादव, एआरएम दीपक चौधरी आदि अफसर ने कर्मचारियों से वार्ता की। रोडवेज प्रबंध निदेशक को भी इस बारे में बताया गया। बाद में कर्मचारियों को आश्वस्त किया गया कि लखनऊ की तर्ज पर ही उनका मानदेय दिया जाएगा। इसके बाद ही कर्मचारी शांत हुए। 

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