कुंभ के मद्देनजर नए वर्ष के मौके पर शुरू की गई रोडवेज की शटल सेवा पहले दिन ही विवादों के घेरे में आ गई। इस सेवा के लिए लखनऊ से आए संविदाकर्मियों ने कम मानदेय दिए जाने का आरोप लगाते हुए सिविल लाइंस बस स्टेशन से शटल बसें निकालने से इंकार कर दिया। बस स्टेशन परिसर में ही संविदा चालकों एवं परिचालकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। तकरीबन दो घंटे तक संविदाकर्मियों ने बसें नहीं निकलनी दीं। बाद में अफसरों ने कर्मचारियों से वार्ता कर उन्हें आश्वस्त किया कि जो मानदेय उन्हें मिलता आया है, वही उन्हें मिलेगा।
मंगलवार की सुबह तमाम रूटों के लिए वर्कशॉप और सिविल लाइंस बस स्टेशन से बसें निकली भीं, लेकिन लखनऊ से आए 86 संविदा परिचालक एवं इतनी ही संख्या में आए चालकों ने बस चलाने से इंकार कर दिया। संविदा कर्मी अजय त्रिपाठी, संदीप शुक्ला, सुखदेव सिंह, रंजीत सिंह आदि ने बताया कि माह भर में 22 दिवसों में पांच हजार किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। इसकी एवज में रोडवेज उन्हें भुगतान करता है। बहुत से कर्मचारियों को प्रतिकिमी के हिसाब से भुगतान होता है। लखनऊ की बात करें तो वहां नियमित रूप से 350 किमी के आसपास दूरी तय करते हैं। एक किमी का 1.36 रुपये का भुगतान होता है।