संगमनगरी के पर्यटन को नए आयाम पर पहुंचाने के लिहाज से महाकुंभ-2025 को एक बड़े अवसर के ताैर पर देखा जा रहा है। पर्यटन विभाग की कोशिश है कि नए बदलावों के जरिये अधिक से अधिक संख्या में विदेशी पर्यटकों को भी शहर की ओर आकर्षित किया जा सके।
शृंग्वेरपुर धाम रामायण सर्किट का सबसे अहम पड़ाव बनेगा। अयोध्या के बाद इसे देश के दूसरे सबसे बड़े रामतीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। महाकुंभ से पहले रामायण सर्किट से जुड़े इस पड़ाव पर वहां निषादराज से गले मिलते प्रभु श्रीराम का दर्शन कर श्रद्धालु धन्य हो सकेंगे।
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संगमनगरी के पर्यटन को नए आयाम पर पहुंचाने के लिहाज से महाकुंभ-2025 को एक बड़े अवसर के ताैर पर देखा जा रहा है। पर्यटन विभाग की कोशिश है कि नए बदलावों के जरिये अधिक से अधिक संख्या में विदेशी पर्यटकों को भी शहर की ओर आकर्षित किया जा सके। ऐसे में रामायण सर्किट योजना के तहत उन स्थानों का जीर्णोद्धार और सुदंरीकरण किया जा रहा है, जहां से पाैराणिक कथाओं में श्री राम के जीवन से जुड़ी कहानियों का जिक्र है।
शहर से 40 किमी दूर शृंग्वेरपुर धाम में निषादराज पार्क को भव्य और अलाैकिक रूप दिया जा रहा है। इस स्थान का संबंध श्रीराम के वनवासकाल से रहा है। यही कारण है कि यहां पर स्थित निषादराज पार्क को इस योजना का हिस्सा बनाया गया है। दो चरणों में इस पार्क को विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में 19 करोड़ और दूसरे में 14 करोड़ की लागत से पार्क को संवारा जा रहा है। यहां प्रभु श्रीराम और निषादराज की गले मिलते 51 फीट ऊंची प्रतिमा सबसे खास और मोहक है। महाकुंभ में यहां आने वाले लाेगों के लिए यह प्रतिमा आकर्षण का केंद्र होगी। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन को और करीब से जानने के लिए 33 करोड़ रुपये निषादराज पार्क पर खर्च होंगे।
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निषादराज पार्क में ओपन एयर थिएटर और ध्यान केंद्र होगा खास
इस पार्क में प्रवेश द्वार का निर्माण भव्यता का प्रतीक होगा। इसके अलावा कैफेटेरिया, केयरटेकर रूम, ध्यान केंद्र, टॉयलेट ब्लॉक बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा ओपन एयर थिएयर और गैलेरी भी यहां पर आने वाले पर्यटकों का खूब ध्यान खींचेगी। इस गैलरी में प्रभु श्रीराम और उनके वन गमन के दौरान शृंग्वेरपुर से जुड़ी घटनाओं को दर्शाया जाएगा। अगस्त तक इस पार्क के निर्माण का काम पूरा कर लिया जाएगा।