वाराणसी के जिला जज ने 12 सितंबर के आदेश से हिंदू पक्ष की महिलाओं की ओर से शृंगार गौरी की नियमित पूजा-अर्चना की मांग में दाखिल वाद के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज कर दी थी। आपत्ति खारिज कर मुकदमे की सुनवाई करने का आदेश दिया है, जिसे चुनौती दी गई है।
मालूम हो कि दिल्ली की राखी सिंह तथा कई अन्य महिलाओं ने जिला जज वाराणसी की कोर्ट में वाद दायर कर ज्ञानवापी परिसर के बाहरी हिस्से में स्थित शृंगार गौरी की नियमित पूजा-अर्चना किए जाने की मांग की है। मुस्लिम पक्ष की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद की अंजुमन-ए-इंतजामिया कमेटी ने हिंदू महिलाओं के बाद पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि यह वाद सिविल प्रक्त्रिस्या संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है। इसे खारिज किया जाना चाहिए। जिला जज ने मुस्लिम पक्ष की ओर से उठाई गई आपत्ति की अर्जी खारिज कर दी थी।
दिल्ली की राखी सिंह समेत 5 महिलाओं ने वाराणसी की जिला अदालत में बीते वर्ष वाद दाखिल कर शृंगार गौरी की पूजा-अर्चना किए जाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई वाराणसी के जिला जज की कोर्ट में चल रही है। मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर महीनों चली सुनवाई के बाद जिला जज की कोर्ट ने अगस्त महीने में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। जिला जज एके विश्वेश की कोर्ट ने 12 सितंबर को अपना फैसला सुनाते हुए मुस्लिम पक्ष की आपत्ति को खारिज करते हुए राखी सिंह केस को जारी रहने की इजाजत दी थी।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मुस्लिम पक्ष ने एक बार फिर दोहराया कि 1991 के ‘प्लेसेज आफ वर्शिपएक्ट’ के तहत इस मामले की सुनवाई नहीं की जा सकती है। अर्जी में हाईकोर्ट का फैसला आने तक वाराणसी की अदालत में जारी सुनवाई पर रोक लगाए जाने की भी मांग की गई है। ज्ञानवापी विवाद से जुड़े पांच मामले पहले से ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित हैं। हालांकि राखी सिंह का केस पहली बार हाईकोर्ट आया है।