लिहाजा दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों व दलीलों के आधार पर ही मामले को निस्तारित किया जा सकता है। ऐसे में अदालत से मामले को ट्रायल से निस्तारित करने की मांग की। वहीं, ''''मासीरे आलम'''' किताब का जिक्र करते हुए कहा कि मथुरा, काशी और अयोध्या में मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में लिमिटेशन एक्ट, वक्फ एक्ट व वर्शिप एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
वहीं शूट नंबर 4 में आशुतोष पांडेय ने व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में आपत्ति की प्रतिआपत्ति दाखिल की। श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी व न्यायमित्र अधिवक्ता मार्कंडेय राय, वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन व तसनीम अहमदी ने पक्ष रखा।