वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता विण्णु शंकर जैन ने पक्ष रखते हुए कहा कि विवादित संपत्ति का पूर्ण भाग पर प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम 1958 के प्रावधान लागू हैं। इसकी अधिसूचना 26 फरवरी 1920 को ही जारी की जा चुकी है। अब इस संपत्ति पर वक्फ के प्रावधान लागू नहीं होंगे। अन्य कई दलीलें दीं।
इस दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी, वीडियो कांफ्रेंसिंग से वरिष्ठ अधिवक्ता तसनीम अहमदी, अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह, अधिवक्ता सत्यवीर सिंह, अधिवक्ता नसीरुज्जमा, अधिवक्ता इमरान आदि अपना पक्ष रखने के लिए मौजूद रहे।