सोशल मीडिया-पुलिस की मदद से कराते हैं पहचान
आरिफ ने अज्ञात-गुमशुदा तलाश के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं। इसमें जिले के साथ-साथ आसपास के जिलों की पुलिस व समाजसेवी जुड़े हुए हैं। जब भी कोई अज्ञात शव मिलता है तो थाने की पुलिस से तस्वीर लेकर विभिन्न ग्रुपों पर डाल देते हैं। इससे पहचान करना आसान हो जाता है।
बुराई करने वाले आज कर रहे तारीफ
बकौल आरिफ, शुरू में सोशल मीडिया ग्रुपों पर अज्ञात शवों की तस्वीरें डालने पर कई लोग कहते थे कि हिंदू है, उसके बारे में क्यों पता कर रहे हो। कई बार लोग धार्मिक टिप्पणियां भी करते थे। मैंने सबको नजरअंदाज किया। मेरे लिए इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।
डॉक्टर बनने का था सपना, हादसे ने तोड़ा
आरिफ की तमन्ना डॉक्टर बनने की थी। इंटर के बाद वह इसकी तैयारी भी कर रहे थे। एक दिन स्कूटर से बैंक की तरफ जा रहे थे कि विश्वविद्यालय के सामने तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी। इसमें उनका बायां पैर टूट गया। हादसे ने पैर ही नहीं तोड़ा, उनका डॉक्टर बनने का हौसला और सपना भी चकनाचूर कर दिया।
24 घंटे में ही मृतक के भाई तक पहुंचे
28 नवंबर-23 की बात है। पूना से घर लौटते समय एक युवक की ट्रेन से गिरकर छिवकी स्टेशन के पास मौत हो गई। पहचान नहीं होने की बात आरिफ को पता लगी। उन्होंने तस्वीरें लेकर अपने ग्रुपों के साझा कीं। अगले ही दिन भाई दशरथ ने मृतक की पहचान फाफामऊ के गौरा बारी गांव निवासी मंगला प्रसाद के रूप में की।
दो दिन में हो गई साधु की शिनाख्त
मिर्जापुर के रहने वाले एक साधु का पिछले साल 20 जनवरी को सदर कोतवाली थाना क्षेत्र में अज्ञात रूप में शव मिला था। ग्रुप में तस्वीरें साझा करने के दो दिन बाद साधु की पहचान उनके भतीजे राहुल पांडे ने की। घर वाले आए और शव का विधि विधान से अंतिम संस्कार कराया।