कहा कि प्रमोटर्स ने बिना किसी निवेश के फ्लैट खरीदारों से 636 करोड़ रुपये एकत्र किए। बाद में उसमें से 190 करोड़ निकालकर अपने ही द्वारा बनाई हुई दूसरी कंपनी में निवेश कर दिया। इसके अलावा नोएडा अथॉरिटी की ओर से आवंटित भूमि के एक ही हिस्से को कई-कई फ्लैट खरीदारों को बेचा और उससे कुल 236 करोड़ रुपये एकत्र किए।
इस तरह उन्होंने सैकड़ों खरीदारों को धोखा दिया। इसके बाद कंपनी के मुख्य पदों से इस्तीफा दे दिया और अपने से नीचे कर्मचारियों को प्रमुख पदों पर बिठाकर दिवालिएपन में ढकेलकर देनदारियों से भी छुटकारा पा लिया। राज्य के अधिकारी ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
मामले में प्रमोटर्स को 2010 में नोएडा अथॉरिटी से सेक्टर 107 में GH01 भूमि आवंटित हुई थी। आवंटित भूमि पर उन्हें फ्लैट बनाकर खरीदारों को देना था। प्रमोटर्स ने फ्लैट बनाने से पहले ही खरीदारों से कीमत वसूल ली थी, जिन्हें मिले भी, आधे-अधूरे फ्लैट मिले।
खरीदारों ने याचियों के खिलाफ संबंधित थाने में धोखधड़ी का मामला दर्ज कराया और नोएडा अथॉरिटी के समक्ष शिकायत कर अपने पैसे की वापसी और अपनी करोड़ों की बकाया राशि के भुगतान की मांग की। प्रमोटर्स ने इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।