अनस का कहना है कि पहले आदेश के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने लिसाड़ी गेट पुलिस से ऊंट को वापस करने को कहा था, लेकिन इसके बावजूद ऊंट वापस नहीं मिले, जबकि इस बारे में कई बार सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट से विधिक स्वामी के पक्ष में ऊंट को सौंपने का आदेश दिया गया।
याची का कहना है कि या तो उसे सभी ऊंट दिलाए जाएं या उनका हर्जाना दिया जाय। अधिवक्ता शम्स-उ-जमां के अनुसार याचिका में प्रदेश सरकार के गृह सचिव, कमिश्नर मेरठ, डीएम, एसएसपी और सिटी मजिस्ट्रेट को पक्षकार बनाया गया है।