नवरात्र की महाअष्टमी तिथि पर शुक्रवार को दुर्गा पूजा पंडालों में संधि पूजा की गई। भक्तों ने दीप जलाकर महिषासुर मर्दिनी की आराधना की। भोर से ही संधि पूजा की तैयारी शुरू कर दी गई। कर्नलगंज, राजरूपपुर, सिविल लाइंस, कटरा, टैगोरटाउन सहित शहर के अनेक स्थानों पर विराजित मां दुर्गा के पंडालों में संधि पूजा की गई।
नवरात्र की महाअष्टमी तिथि पर शुक्रवार को दुर्गा पूजा पंडालों में संधि पूजा की गई। भक्तों ने दीप जलाकर महिषासुर मर्दिनी की आराधना की। भोर से ही संधि पूजा की तैयारी शुरू कर दी गई। कर्नलगंज, राजरूपपुर, सिविल लाइंस, कटरा, टैगोरटाउन सहित शहर के अनेक स्थानों पर विराजित मां दुर्गा के पंडालों में संधि पूजा की गई। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया।
विज्ञापन
भक्तों के अनुसार देवी दुर्गा ने 'संधिकाल' में दो असुरों, चंदो और मुंडों का वध किया था। इसके कारण देवी का 'चामुंडा' नाम पड़ा। भक्त दीप जलाकर उनकी पूजा करते हैं। कमल और अन्य सुगंधित फूल के साथ पुष्पांजलि अर्पित की जाती है। संधि पूजा अष्टमी तिथि समाप्त होने से 24 मिनट पूर्व और नवमी तिथि शुरू होने के 24 मिनट बाद तक देवी मां चामुण्डा की पूजा की जाती है। दो घटी यानी 48 मिनट तक संधि पूजा की जाती है। इस शुभ मुहूर्त में मां दुर्गा के स्वरूप देवी चामुण्डा की उपासना की जाती है।